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एक प्यार भरी चुदाई की कहानी

अभिलाषा के मुख से आती हुई भीनी भीनी चीखें मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजित कर रही थीं और मैं और तेज़ी से धक्के लगा रहा था। मैंने भी जोश में आके अभिलाषा के गालों को चाटना शुरू कर दिया। मेरे हाथ अब भी अभिलाषा की चुची का मर्दन कर रहे थे।

मैंने अभिलाषा को इशारा करके मेरी बगल चाटने को बोला क्योंकि जब कोई लड़की चुदाई के समय ऐसा करती है तो मेरा खून दुगनी तेज़ी दे दौड़ने लगता है। अभिलाषा के ऐसा करने से मैं इतना उत्साहित हो गया कि मैंने उसके गाल पे एक हल्की सी चपत लगा दी।
मुझे पता था कि ऐसा करने से अभिलाषा अपनी चुत को भींचेगी और लंड चुत के बीच घर्षण बढ़ेगा जिससे इस चुदाई में और भी ज्यादा मज़ा आएगा।
अभिलाषा- ओह राहुल, क्या कर रहे हो?
मैं- तुम बहुत मज़ा दे रही हो मेरी जान…
और कहते कहते मैंने अभिलाषा को एक और चपत लगा दी, इस बार थोड़ी जोर से…

इस चपत के साथ ही अभिलाषा चीखों के साथ जोरदार तरीके से दोबारा झड़ने लगी और उसके रस मेरे लंड को डुबोते हुए उसकी चुत से बाहर रिसने लगे। अभिलाषा की चुत इतना ज़ोरों से बह रही थी कि उसके रस उसकी चुत से होते हुए अंदरुनी जांघों के रास्ते उसकी गांड को गीला करते हुए बिस्तर को भिगोने लगे।

अभिलाषा के मुँह से निकल रही चीखों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था- राहुल, तुमने ये क्या कर दिया मुझको। मुझे ऐसा सुख पहले कभी नहीं मिला राहुल!
‘हमम्म…’ मैंने एक और चपत लगाते हुए हुंकार भरी।
यह चपत पिछली चपत से भी जोरदार थी और मुझे ऐसा जंगली प्यार करने में भी अब मज़ा आने लगा था। मेरी चपत से अभिलाषा का गाल लाल होने लगा था और उसको उससे होता दर्द भी उसकी सिसकारियों में सुना जा सकता था पर शायद उसकी चुदाई से जो सुख उसको मिल रहा था वो इस दर्द पे कुछ ज्यादा ही हावी था।

अभिलाषा- ऐसे मत करो ना, बहुत कंपकपी छूट रही है तुम्हारी चपत से राहुल… और अब दर्द भी हो रहा है।
मैं- मज़ा भी तो आ रहा है इस कसावट से मेरी जान! इन चपत के बिना तेरी चुत थोड़ी ढीली लग रही थी पर अब उसमें जो कसावट आई है, वो कुछ ऐसी है जैसे मैं कोई नई चुत खोल रहा हूँ!
कहते कहते मैंने अभिलाषा को एक और जोरदार चपत लगा दी।

अभिलाषा- मज़ा तो बहुत आ रहा है पर तुम्हारा बहुत अंदर तक जा रहा है राहुल। और हर चपत के साथ तुम्हारा पहले से ज्यादा मोटा होता जा रहा है…
मैं- क्या अंदर तक जा रहा है अभी? क्या है जो मोटा होता जा रहा है?
अभिलाषा शरमाते हुए- तुम्हारा लंड राहुल…
मैं एक और हुंकार भरते हुए- मेरा लंड मोटा नहीं हो रहा मेरी जान, तेरी चुत सिकुड़ रही है चपत से…

अभिलाषा- ओह राहुल, तुम बहुत अंदर तक जा रहे हो। कहीं कुछ हो तो नहीं जाएगा ना?
मैं- हो जाएगा तो उसको भी देख लेंगे। पहले इस पल का आनन्द तो लेने दे…
अभिलाषा- ओह राहुल… रआआआ… हूउउउउललल… आई लव यू राहुल…

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मैंने अपनी चुदाई जारी रखते हुए अपने धक्कों की गति को बढ़ा दिया। अभिलाषा अब तक दो बार झड़ चुकी थी और मेरा लंड तनाव भी महसूस नहीं कर रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे सारी गर्मी आज अभिलाषा की चुत में ही भर देगा।
अभिलाषा भी अब थकने लगी थी और मुझे जल्दी करने को बोल रही थी।
मैंने उसको बोला- मुझे अभी थोड़ा समय लगेगा!
तो उसने मेरी पीठ पर अपने हाथ घूमने चालू किये और बीच बीच में वो मुझे अपने नाखून भी चुभा देती।

अभिलाषा मुझे अपनी जीभ से हल्के हल्के चाट भी रही थी और अब उसने मुझे अपने दांतों से काटना भी शुरू कर दिया था। शायद इस लम्बी पारी से उसको कुछ ज्यादा ही दर्द हो रहा था और वो चाह रही थी कि मैं जल्दी ही उसकी चुत को अपने रस से निहाल कर दूँ। उसने अपनी चुत को भी हिलाना शुरू कर दिया था और वो कुछ ऐसे लयबद्ध तरीके से ऊपर नीचे हो रही थी जिससे मेरे लंड को ज्यादा से ज्यादा घर्षण महसूस होने लगा था।
अब मैं भी अपने लंड में एक खिंचाव महसूस करने लगा था और मेरा लावा थोड़ी ही देर में फूट सकता था। मैंने अभिलाषा को बोला कि वो मुझसे थोड़ी गरमागरम बातें करे ताकि मैं जल्दी ही झड़ सकूँ…

अभिलाषा- ओह राहुल, फाड़ को मेरी चुत को, आज बहुत दिनों बाद ये सुख मिला है मुझे। अपने लंड की बौछार से मेरी चुत को तर कर दो मेरे दोस्त। मैं ज़िन्दगी भर तुम्हारी गुलाम बनके रहूंगी बस मेरी चुत को इतना फाड़ो जितनी ये कभी नहीं फटी राहुल…

अभिलाषा के शब्द मेरे कानों में जादू कर रहे थे और अब मैं भी चरम पे पहुंचने लगा था। मैंने अभिलाषा को अपनी बाहों में जकड़ लिया था और मेरे लंड और उसकी गांड की थाप से होने वाली आवाज़ कमरे की दीवारों से टकरा कर गूंजने लगी थी।
हम दोनों पहले ही अभिलाषा के रसों से भीगे हुए थे और बची हुई कसर हमारे पसीने ने पूरी कर दी थी। मैं लगातार धक्के लगा रहा था और हम दोनों की कराहटें असीम आनन्द का अनुभव करा रही थीं।
मुझे भी अब धक्के मारते मारते दर्द होने लगा था और मैं एक लावा छोड़ने की सीमा तक पहुंच चुका था। अभिलाषा का शरीर भी अकड़ने लगा था और अभिलाषा ने एक हुंकार के साथ एक बार फिर से अपना झरना बहा दिया था। अभिलाषा के गरमा गरम रस ने जैसे ही मेरे लंड को छुआ की मेरे लंड ने जैसे एक ज्वालामुखी छोड़ दिया। एक के बाद एक बौछार मेरे लंड से निकलती ही चली गई।
जैसे ही मेरा बीज अभिलाषा की चुत में गिरा, अभिलाषा ने अपनी आँखें बंद कर ली और उसकी एक आँख से मोती जैसी एक आंसू की बून्द बह गई।

इधर उसकी चुत भी पूरे प्रवाह से बह रही थी और हम दोनों के दिलों की धड़कन को वहाँ आसानी से सुना जा सकता था। मैंने इतना लावा बहाया कि आधे से ज्यादा पलंग गीला हो गया था। मेरे लंड में एक सुखद अहसास के साथ साथ जलन भी हो रही थी पर मैं बहुत समय के बाद तृप्त हुआ था, मैंने ऐसी धुआंधार पारी बहुत समय के बाद खेली थी और मुझे खुद पर गर्व भी था कि मैं अभिलाषा को संतुष्ट कर सका।

हम दोनों को सांसें पकड़ते संभालते बहुत समय लगा। फिर मैंने घड़ी की तरफ देखा तो पाया कि हमारी चुदाई करीब डेढ़ घंटा चली थी। शायद इसीलिए मुझे चलने में भी दर्द हो रहा था। जिन्होंने लम्बी चुदाई की है, वो जानते होंगे कि लम्बी चुदाई करने से पेट के निचले हिस्सों मतलब करीब किडनियों के ऊपर में बहुत दर्द होता है।

फिर हम दोनों एक दूसरे की बाहों में ही सो गए। सो कर उठे तो नहाने चले गए और एक राउंड चुदाई का नहाते नहाते चला।

हम शिमला में दो दिन रुके और भरपूर चुदाई की। दो दिन और एक रात में हमने कुल सात बार चुदाई की जिसमें मैं सात बार झड़ा और अभिलाषा पता नहीं कितनी बार!
उसने बाद की चुदाई में मेरा लंड भी चूसा और हम दोनों की चुदाई की कहानी पूरे तीन साल तक चली।
अभिलाषा को मुझसे एक बेटी भी है जिसका नाम हमने मंशा रखा है।

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