loading...

“चाची को चोदने की हसरत”-4

Antarvasna story, hindi sex story, desi kahani, chudai ki kahani, sex kahani

चाची सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा कि चाची के बीमार होने पर मैंने उनकी सेवा की और मुझे चाची की चुदाई का मौक़ा भी मिला|
चाची की दूसरी चुदाई करने के बाद चाची की सांसें अभी भी तेज चल रही थी| चाची बोली:- अरे उमेश, तुम कितना चोदते हो, मेरी चुत की हालत खराब हो जाती है… आह!

मैं हल्का सा मुस्कुरा कर बोला:- चाची, अब मुझे आपकी गांड मारनी है|

चाची बोली:- क्या गांड, नहीं नहीं वो नहीं…

मैं:- क्यों?

चाची:- नहीं, अपनी चाची की चूत जितनी मर्जी चोद, कभी नहीं रोकूंगी पर गांड का चर्चा नहीं करना… वो अच्छा नहीं होता, गन्दा होता है|

मैं:- मेरे मोबाइल में देखो तो वो लोग कैसे गांड चोदते हैं|
मैंने मोबाइल में से बी एफ खोल के दिया| चाची देखने लगी| चाची ने आश्चर्य से बोली:- हाँ रे उमेश, ये तो सच में, अरे बाप रे…!

चाची और आगे देखने लगी|

फिर चाची बोली:- अरे उमेश ये देख, दो दो आदमी चोद रहा है एक गांड में!

मैं मुस्कुरा कर जबाब दिया:- हाँ चाची, देखिये न!

चाची देखते हुए बोली:- उमेश, कितना मजा आता होगा!

मैं:- हाँ चाची… बहुत मजा आता है|

चाची अब गर्म होने लगी थी, उसकी आँखों में हवस नजर आ रहा था| चाची मेरे ओर देखने लगी और बोली:- अरे उमेश क्या ऐसा मजा हमें नहीं मिल सकता है| फिरं चाची मेरे ओर देख कर बोली:- ठीक है मार ले पर आराम से मारना, तुम्हारा लंड बहुत मोटा है|

मैं खुश हो गया और बोला:- ठीक है आराम से नहीं प्यार से मारूंगा मेरी जान वो भी तेल लगा के|
मेरा लंड गांड के नाम से खड़ा हो चुका था, मैं सरसों का तेल लगा कर आया, चाची वहीं सोफे पर झुक गई और साड़ी उठा कर एक हाथ से चूतड़ के दोनों भाग अलग किए जिससे गांड के छेद को मैं देख सकूं|

मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ों को फैला कर उसकी गांड के छेद को चौड़ा कर दिया और अपनी एक उंगली को अपने थूक से गीला करा कर उसकी गांड में धकेलने की कोशिश करने लगा|

चाची की गांड बहुत टाइट थी, मगर मैंने उसकी गांड को तेल से भिगाया|
मैंने अपने खड़े लंड को उसकी गांड के छेद के सामने लगा दिया, चाची बोली:- अब धीरे से पेलना!

पर मैंने एक जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा लंड उसकी गांड में एक ही धक्के में पेल दिया| तेल लगे होने के कारण बिना कोई रुकाबट के घुस गया| ‘आहहऽऽऽ…!!! उमेश उईई उमेश मत करो मेरी फट रही है मैं नहीं झेल पाऊँगी ऊईई ईई छोड़ो!!’ कहते हुए पैर पटकने लगी थी| चाची एकदम से चीख पड़ी और खड़ी हो गई| फिर गुस्से से बोली:- मैं कह रही हूँ कि धीरे से डालो और तुमने पूरा एकदम से डाल दिया|

मैं:- सॉरी चाची जान सॉरी! अब ग़लती नहीं करूँगा, धीरे से ही डालूँगा! सॉरी!

चाची फिर फर्श पर ही उल्टी लेट गई और वो धीरे धीरे मेरी गाण्ड में अपना लंड डालने लगा|

जैसे जैसे लंड अंदर जा रहा था वैसे वैसे चाची कह रही थी:- आई ईईई… उई ईईई मा… मां री! आई ईइआ… उउ… सस्स… आह्ह!
मेरा लंड गांड में जा चुका था|

फिर मैं चाची के कान के पास जा कर धीरे से बोला:- जान अब ठीक है?

चाची बोली:- बस उमेश बस! अब बस करो! निकाल लो इसे! बहुत दर्द हो रहा है|

loading...

मैं चाची के कान में ही बोला:- बस यार, थोड़ा सा! बड़ी टाइट है तेरी गाण्ड! आ… एयेए… आह… आह्ह्ह! बस थोड़ी देर बर्दाश्त कर लो|
मैंने फिर अपना लंड पूरा बाहर निकाल लिया और गांड के छेद पर भिड़ा कर एक जोर का झटका दिया और इस बार फिर मेरा पूरा लौड़ा उसकी गांड में घुस गया|

चाची तो दर्द के मारे चिल्ला उठी:- कुत्ते अईई… कमीनेएए… मादरचोद… अईई… ईईईई… छोड़ मुझे!

बोल कर मुझे धकेलने लगी पर मैं चाची के कमर को कस कर दबा रखा था, मैंने उसको नहीं छोड़ा, मैंने फिर जोर से लंड अंदर बाहर कर चोदना चालू कर दिया| चाची जोर:-जोर से चिल्लाती रही:-

मुझे छोड़ दे साले, हउमेशी, मैं मर जाऊँगी, छोड़ दे मुझे, मादरचोद छोड़ दे, मुझे!
चाची बोलती रही, चिल्लाती रही, गिड़गिड़ाती रही पर मैंने उस पर थोड़ा भी रहम नहीं किया| वहाँ उसकी चीख सुनने वाला भी कोई नहीं था, मैं गांड को जोर:-जोर से चोदता रहा|

मुझे बहुत ही मजा आ रहा था|
धीरे:-धीरे वो भी शान्त होने लगी, अब शायद चाची को अच्छा लगने लगा था और मेरा साथ देने लगी, बोली:- उमेश अच्छा हुआ, तू नहीं रुका, अब मुझे बहुत मजा आ रहा है, अब चोद मुझे और जोर से चोद मुझे… आह ईई सच में गांड मराने में भी मजा आ रहा है|
मैं उत्तेजना के कारण पागलों की तरह जोर जोर से अपनी कमर को हिलाकर चोदने लगा और ‘ईइइशश… अआहह्ह्ह… ईइइशश… अआआहहह्ह्ह…’ की आवाज करने लगा|

मैंने अपने दोनों हाथों से चाची के कमर को छोड़ कर कँधों को पकड़ लिया और स्पीड बढ़ा दिया जिससे चाची और उत्तेजित हो कर मुँह से इईशश… श…श… अआआहहा… हाँ…हाँ… इईशश… श…श… अआहहा… हम्म…हाँ… की मादक सिसकारियाँ निकालने लगी जिससे मेरा जोश दोगुना हो गया और मैं तेजी से धक्का लगाने लगा|

अब चाची जोरों से चिल्ला रही थी:- आअहह आहह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… उमेश आययई ह्ह्ह्ह मेरे ग्ग्ग्ग गांड में सूऊ सुर सू सूऊ सुरसुराहट हो रही आह है… रुक मत और ज़ोर से पेल ईई ईई आहह…
‘मज़ा आ रहा हैं चाची?’ मैं बोला|

‘हां उमेश ब ब्बब्ब बहुत!’

‘जोर से लंड चाहिए अपनी गांड में?’

‘हां… उमेश हाँ ये ये जोर अब मजा आ आ स आ रहा है|’

‘तो ये ले…’ अब मैं लंड को जड़ तक अंदर बाहर कर रहा था|

चाची आह आह उईई कर मजा ले रही थी|
फिर अचानक वो और ज़ोर से ‘आआआ अहह… आआआअहह’ करके चिल्लाने लगा और मैं बहुत ही तेज़ी से गांड मारने लगा|

मैं अब झरने के बहुत करीब था| मैंने अपने दोनों हाथों से चाची की कमर को ज़ोर से जकड़ लिया| चाची हिल नहीं पा रही थी और मैं अब लंड अंदर बाहर नहीं कर रहा था, गांड के अंदर ही रोक दिया था|

‘साले कुत्ते ये क्या कर रहा है, रुक क्यों गया ययय?’ चाची चिल्लाई मुझ पर|
‘आआहह… आआअहह…’ करके मैंने झरना शुरू किया|

‘आआई यईईई आऐईयईईई…’ कर चाची भी चिल्लाई|

मैंने अपना वीर्य चाची की गांड में भर दिया|
आख़िर मैंने अपना लंड बाहर निकाला फिर चाची के पेटीकोट से पौंछा और खड़ा हुआ| चाची भी उठी और अपनी गांड मको पेटीकोट से पौंछ कर मेरे लंड को हाथ में लेकर बोली:- तुम्हारा लंड तो कमाल है|

अब मैं चाची से खुल चुका था, मैंने कहा:- हाँ मेरी रानी… तुम भी तो कमाल की हो!

चाची जोर से हंसने लगी|
फिर चाची बोली:- तुम बैठो, मैं चाय बना कर लाती हूँ|

चाची चाय बनाने किचन में चली गई|
उसी समय मेरी चचेरी बहन मिना कोचिंग से आ गई, मुझे देख कर बोली:- छोटे, क्या अब माँ ठीक है?

मैं:- हाँ दीदी, चाची अब ठीक है… सूई का कोर्स पूरा हो गया है| और अगर कोई दिक्कत होगी तो मैं हूँ न!
उसी समय चाची आ गई चाची बोली:- हाँ बेटी, अब ठीक हूँ… वैसे उमेश ने पूरा ख्याल रखा है|

मिना बोली:- हाँ माँ, छोटे नहीं होता तो गाँव में कोई सूई देने वाला भी नहीं है|
फिर चाची ने चाय मुझे दी, मैं चाय पीने लगा| मिना कुर्सी पर बैठ गई| मैंने मिना को ध्यान से देखा तो उसकी भी चूची बढ़ चुकी थी|
कुछ देर में चाय पी कर मैं वहाँ से निकल गया, बाजार जा कर सब्जी खरीद कर माँ को दे आया फिर अपने कमरे में जा कर मोबाइल में बी एफ देखने लगा|
अब मेरे ऊपर हवस सवार हो गई थी, हर किसी को मैं चोदने की नजर से देखने लगा था|

दूसरे दिन क्लिनिक से लौटने के बाद फिर चाची को चोदने उसके घर गया| वहाँ गया तो देखा कि चाचा जी आ चुके थे| मेरा मन उदास हो गया|

चाची ने चुप रहने का इशारा किया|
मैंने चाचा को प्रणाम किया| चाचा ने मेरा हाल चाल पूछा| फिर मैं चाय पी कर वहाँ से चला आया|

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading...