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चुदाई देख मेरी बुर ने भी पानी छोड़ दिया

antarvasna sex kahani hindi sex story जबरदस्त ठुकाई देख कर मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया एयर मुझे भी चुदवाने का जी करने लगा। अंकल का लंड देख मेरी कुंवारी बुर में खलबली मच गई. मैंने भी अंकल से बुर चुदवाने की सोची. मैं सुमन (बदला हुआ नाम) मेरे घर के पास ही मेरी फ्रेंड दीपा रहती है उसके घर में मम्मी ऊषा आंटी और उसके शराबी पापा हैं और वो मेरी अच्छी दोस्त है.. अक्सर आना-जाना लगा रहता है। उसके पापा अक्सर शराब पीकर पड़े रहते हैं। उसकी मां ऊषा जो बहुत ही सुन्दर है.. अक्सर लोग तारीफ करते हैं कि क्या बोल्ड औरत है और इसका पति मरियल सा शराबी एक नंबर का बेवड़ा है।

    वो भी अक्सर अपने पति से लड़ती रहती थी, उन दोनों की जम नहीं रही थी। साथ ही वो सड़क पर गुजरते लड़कों को अक्सर आते-जाते ताकती.. कभी वो अपने बेटे के मित्र से चिपक कर बातें करती तो कभी उनसे हंसी-मजाक किया करती। वे लड़के भी 18-19 साल के फस्ट ईयर के छात्र थे, बेटे के दोस्त होने से कोई कुछ नहीं कहता। कभी वो भी आंटी-आंटी कह कर घुल-मिल कर बातें करते, मजाक करते।

    एक दिन की बात है.. जब मैं दीपा के घर अचानक उसे ढूँढते हुए उसके घर चली गई। दोपहर का समय था घर में सुनसान था। मैंने दरवाजा धक्का मारा और अन्दर आ गई.. एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते हुए बेडरूम के पास पहुँची तो देखा परदा गिरा हुआ था और अन्दर एक लाईट जल रही थी।

    मैंने सोची दीपा होगी.. अभी से सो रही है। मैंने धीरे से परदा हटाया और देखते ही दंग रह गई। ऊषा आंटी को पड़ोस वाले अंकल चोद रहे थे। मैं अचम्भे में रह गई कि ये क्या हो रहा है। मैं उनको देखने लगी.. वो खाट के सिरहाने के पास खड़े होकर अपना लंड ऊषा आंटी को चुसवा रहे थे। अंकल का लंड काफी गोरा और लंबा था और उनका हाथ आंटी की चुत को गर्म करने में लगा था। वो चुदाई में इतने मस्त थे कि कोई खड़ा है.. उनको परवाह ही नहीं थी।

    फिर वो आंटी के ऊपर आ गए और दोनों टांगों के बीच आकर बड़ा सा लंड आंटी की चुत में दे मारा।

    आंटी चिल्ला उठीं ‘उइइ.. उहहह..’ आंटी ने अपने दोनों पांव फैला दिए और अंकल के लंड से चुदने लगीं। अंकल बेतहाशा चुदाई करने लगे।
    आंटी का बदन अकड़ने लगा.. वो अंकल की पीठ पर अपना हाथ फेरने लगीं और किस देने लगीं, वो कहने लगीं- अह.. मैं झड़ने वाली हूँ.. अच्छे से चोदो राजा.. चुदाई के लिए कितना तड़पती हूँ ओइ.. अह..
    ‘अह.. बस डार्लिंग मेरा भी हो गया बस..’

    ‘ओह.. बस करो बस.. मैं झड़ रही हूं.. लग रही है..’ यह कहते हुए आंटी अंकल से लिपट गईं और अंकल उन्हें बेतहाशा चोदने में लगे थे। उनका लंड चुत में अन्दर-बाहर होते दिखाई दे रहा था। अंकल का कितना बड़ा लंड था.. जिसे वो बार-बार चुत में डालते और बाहर खींचते। आंटी ने अंकल को पकड़ लिया और अपने बदन को उठाने लगीं।

    अब आंटी फिर से गरम हो गई थीं और वो नीचे से खुद धक्का मार रही थीं।
    उसी वक्त अंकल चिल्लाए- ले साली चुद ले.. आज तेरा पति तो नहीं चोदता मेरे से मजा कर ले.. ले साली.. पूरा ले..
    ‘फच फच..’ की आवाज होने लगी।

    चुदाई की आवाज जोरों से आने लगी। आंटी की चुदाई देख कर मेरा हाल बुरा होने लगा.. आज पहली बार मैं किसी की चुदाई होते देख रही थी। मेरी अनचुदी बुर भी गीली हो चली थी, निप्पल कड़े हो चुके थे। मेरे हाथ मेरे स्कर्ट में जाकर बुर को सहलाने लगे।

    तभी आंटी की नजर मेरे पर पड़ गई और उन्होंने अंकल को धक्का मार कर अलग कर दिया।
    मैं भाग कर अपने घर आ गई।

    वो कुछ देर बाद घबराई हुई सी मेरे घर आईं। मैंने उन्हें देखा तो उनकी नजरें नीचे थीं, आंटी बड़े प्यार से पूछने लगीं- कुछ काम था बेटी?
    ‘नहीं आंटी.. बस दीपा से मिलने आई थी।’
    आंटी ने ज्यादा बातें नहीं की और चुपचाप अपने घर वापस चली गईं।

    दूसरे दिन अंकल भी बड़े प्यार से बातें कर मस्का मार रहे थे। मैं उनके लंड को देख चुकी थी। अंकल को देखते ही मेरा मन मचल गया था। भले ही वो 2 बच्चे का बाप था.. एक लड़की और एक लड़का था। उनकी पत्नी मोटी और गोरी थी.. वैसे ही उनके बच्चे भी थे।
    मैं चुपचाप अंकल को देखने लगी.. वो मुस्कुराने लगे और पेंट के अन्दर हाथ डाल कर लंड को हाथों से सहला रहे थे।
    बात आई-गई हो गई।

    फिर एक माह बाद गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो गईं.. उनके बच्चे और पत्नी अपनी नानी के घर चले गए। उनकी पत्नी मेरी माँ से जाते वक्त कह गई थीं कि उनको खाना खिलाना अब आपकी जवाबदारी है कृप्या ध्यान रखना।

    अंकल अकेले थे, मां ने कहा- देख बेटा वो अंकल के घर खाना दे आ और खिला कर ही आना और हां ज्यादा बातें मत करना, वो अलग किस्म का है।
    ‘ठीक है लाओ दे दो.. मैं अभी खिला आती हूँ।’ मैंने खाना पकड़ा और उनके मकान की ओर चली गई।

    शाम को 7 बजे थे.. देखा अंकल आ चुके थे। मैं उनके कमरे में चली गई। अंकल पलंग बैठे थे उनके बदन में केवल एक कच्छा ही था। सामने कूलर चल रहा था और वो ठंडी हवा ले रहे थे।
    मैंने आज उनका पूरा बदन देखा.. क्या मस्त मर्द आदमी था। ऐसे को ही मर्द कहा जाता है.. वो वैसे ही हष्ट-पुष्ट थे। यदि अंकल किसी को पकड़ लें तो छुड़ा पाना आसान ना था।

    मैंने नजर डालीं आस-पास कोई नहीं था.. बाहर की लाईट भी बंद थी, केवल जिस कमरे में थे.. वहीं की एक लाईट जलाए हुए थे। मैं इस रोशनी में उनके बदन को आसानी से देख पा रही थी।
    मेरा मन मचलने लगा.. आंटी की चुदाई मेरी आँखों के सामने घूमने लगी। मेरे सोचने मात्र से मेरे मम्मे टाईट होने लगे और बदन में झुनझुनी होने लगी। मेरा दिल हो रहा था कि अपने पूरे कपड़े उतार कर उनसे चुद लूँ।

    अभी मैं यही सोच रही थी कि उनकी नजर मेरे पर पड़ गई।
    ‘कौन सुमन..?’
    ‘हां अंकल.. मैं, मम्मी ने खाना भिजवाया है।’
    ‘इसकी क्यों तकलीफ की.. मैं होटल से मंगवा लेता। अच्छा चल रख दे.. धन्यवाद कहना अपनी मां को।’
    ‘नहीं अंकल आप खा लो.. मेरे को कहा गया कि खिला कर ही आना.. प्लीज खा लो ना..’
    ‘अच्छा चल जा अन्दर से थाली निकाल ला।’

    मैं जाते वक्त उनके कच्छे से उनके लंड को देखने लगी.. जो सोया हुआ था। मैंने अंदाज लगाया कि करीब 8 इंच का होगा। मैंने अन्दर जाने से पहले गिरने का नाटक किया और मेरे हाथ ने सीधे उनके लंड को पकड़ लिया.. मैं उनकी तरफ झुक गई।
    वो देख कर मुझे सम्भालते हुए बोले- अरे.. लगा तो नहीं..!
    ये कहते हुए मेरी शर्ट के ऊपर अपना हाथ झाड़ने लगे.. जिस पर कुछ दाल गिर गई थी।
    अंकल के छूने मात्र से मेरी बुर की खुजली बढ़ने लगी। मैं देख रही थी वो मेरे मम्मों को दबा रहे थे।

    कुछ पल बाद मैं अन्दर जा कर उनके लिए थाली में भोजन लगा लाई और अभी थाली को टेबल पर रखा ही था कि बिजली चली गई।
    ‘सत्यानाश हो इस बिजली का.. इसे अभी ही जाना था..’ अंकल ने कहा।
    ‘मैं खुश हो गई कि आज भगवान ने मेरी सुन ली, मैं डरने का बहाना बना कर कहा- अंकल, मुझे अंधेरे से डर लगता है।

    अंकल ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने पास बैठाया और बड़े प्यार से बातें शुरू कर दीं। पहले तो वे मेरी पढ़ाई के बारे में बातें करते रहे, फिर इधर-उधर की बातें करते हुए उनके हाथ धीरे-धीरे मेरी जांघों पर घूमने लगे।

    जब मैंने कुछ नहीं कहा तो अंकल ने अपने हाथ मेरी जांघों पर रख दिया। उनका दूसरा हाथ मेरे कंधों से होता हुआ सामने मेरे बटले के ऊपर आ चुका था।

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    वो बातें करते हुऐ मेरी जाँघों को सहलाने लगे और बटले को मुट्ठी में लेकर दबा-दबा कर मजा लेने लगे। मैं भी यही चाहती थी कि वो शुरूआत करें।

    मैं ऐसे बातें कर रही थी.. जैसे कुछ हुआ ही ना हो। अंकल के हाथ फेरने से मेरी स्कर्ट धीरे-धीरे जांघों के ऊपर होने लगी। वो जांघ सहलाने लगे.. सहलाते हुए उनकी उंगली बुर को ऊपर से कुरेदने लगी। साथ ही अंकल के हाथ मेरे मम्मों को दबा गर्म कर करने लगे। अब मैंने अपना पूरा बदन उनके हवाले कर दिया और वहीं खाट पर लेट गई।

    अंकल ने मेरी स्कर्ट ऊपर कर चड्डी को नीचे खिसका दिया और टांगों से अलग कर दिया। अब अंकल मेरी टांगों के बीच में आ गए और मेरी बुर में अपना मुँह रख कर बुर को पीने लगे। मैं मस्त हो चली.. पहली बार किसी मर्द से मैं अपनी बुर को चटवा रही थी। मजा मिलने लगा तो मैंने अपने दोनों पैर फैला दिए और अंकल ने मस्त होकर बुर को पीना शुरू कर दिया।
    उनकी उंगली मेरे मम्मों की ढिबरी को मसलने लगी और तभी लाईट आ गई।

    मैंने देखा मेरे बदन के कपड़े खुल चुके थे वो और मैं बिना कपड़ों के थे। अंकल के हाथ मेरी समीज के अन्दर से होता हुआ बटले को दबा-दबा कर मस्त करने लगे। मेरी आँखें बंद हो चुकी थीं.. मैं उस आनन्द को महसूस करने लगी जो पहली चुदाई में होता है।
    मैं मस्त होने लगी.. बुर गीली हो चुकी थी। उनका हाथ मेरी बुर पर था। अब अंकल ने अपनी उंगली मेरी बुर में डाल दी।
    ‘उइइ.. अह..’

    लेकिन अंकल पूरी उंगली डाल कर बुर को चोदने लगे। मैंने अंकल के कच्छे से नाड़ा खींचा तो कच्छा कमर से नीचे हो गया। मैंने पूरा कच्छा नीचे किसका दिया। अब मैंने उनके लंड को अपनी बुर के पास लगा कर घिसने लगी और चुदने के लिए तिलमिलाने लगी।

    अंकल ने उठ कर मेरे मुँह के पास आकर अपना पूरा लंड मेरे मुँह के पास कर दिया। मैंने लंड को अपने मुँह में ले लिया और अंकल मेरे मुँह में ही लंड को अन्दर-बाहर करने लगे।

    अंकल के मुँह से सीत्कार निकलने लगी ‘ओह.. आह.. सुमन.. आई लव यू.. कितना अच्छा कर रही हो.. और करो डियर.. लंड का पूरा रस पी लो।’
    ‘अह अंकल.. कितना मजा आ रहा है..’
    मैं अंकल के लंड को अन्दर से बाहर तक लेते हुए गीला करने लगी।

    अब वो मुझे अपनी गोदी में बैठाने के लिए तैयार हो गए.. उन्होंने किस करते हुए गोदी में बैठा लिया और मम्मों को बारी-बारी से पीने लगे। मम्मों पे किस करने लगे.. दोनों हाथों से मेरे दूध को मसल-मसल कर सुख देने लगे।

    मैं भी बारी-बारी से अपने दोनों दूध उनके मुँह में देते हुए पिलाने लगी। अंकल ने मेरे दूध चूस-चूस कर मुझे मस्त कर दिया। मैं बुर को खड़े लंड में लेने लगी।
    मैंने कहा- दर्द होगा तो निकाल लेना।
    ‘जबरदस्ती नहीं प्यार से चोदूँगा तुझे सुमन.. प्यार से..’
    ‘हां अंकल उस दिन ऊषा आंटी को चोद रहे थे.. जब से मेरा मन आपसे चुदाई करने को तड़प रहा है। मैं आपके लंड के लिए बेकरार हो गई हूँ अंकल चोदो मुझे भी.. आंटी की तरह चोद दो अंकल।’
    ‘हां मेरी सुमन रानी.. तुझे लंड से प्यार से चुदाई कर खुश कर दूंगा।’
    ‘हां अंकल चोद डालो मुझे.. ऊषा आंटी से भी ज्यादा चुदवाने को तैयार हूँ… मेरा अंग-अंग लंड के लिए तड़प रहा है.. आज मुझे चोद कर शांत कर दो।’

    ‘ठीक है रानी.. तुझे उससे भी अच्छा चोदूंगा..’ ये कहते हुए अंकल ने लंड को बुर के छेद के पास लगाया और मैं हिम्मत कर उनके तने हुऐ लंड पर बैठने लगी। बुर गीली थी.. लंड सरक कर झट से अन्दर आने लगा।
    मैं चीखने ही वाली थी कि अंकल ने किस लेते हुए मेरे होंठों में होंठ रख दिए और नीचे से एक सांट लगा दिया।

    मेरी आँखों से आंसू आ गए।

    ‘फच..’ की आवाज आई और मैं रो पड़ी। उन्होंने मुझे अपने सीने से लगाए रखा और धीरे-धीरे प्यार से हाथ मेरे पीठ को सहलाने लगे। सामने कूलर की हवा भी आज गर्म करने लगी। मैं पसीने से तर होती गई और वो वैसे ही लंड को अन्दर डाले रहे।
    करीब 5 मिनट बाद मैं शांत हुई.. अब वो मेरे मम्मों को सहलाने लगे और धीरे-धीरे अपनी कमर को उठा-उठा कर हल्का-हल्का सांट मार रहे थे।

    मैं अब लंड का मजा लेने लगी और फिर अंकल ने मुझे नीचे करके मेरी बुर में दोबारा लंड पेल दिया और सांट मारने लगे।
    मेरी बुर में अब लंड पूरा अन्दर घुस चुका था। मैंने अपने हाथ से बुर को छुआ तो अन्दर लंड था। मैं अब उछलते हुए चुदाई का आनन्द लेने लगी। वो भी अब धक्के मार रहे थे।

    कुछ ही देर बाद मेरे बदन से कुछ गिरने लगा और मैं झड़ने ही वाली थी.. सो मैंने अंकल को कस कर पकड़ लिया और अपने पैर को हाथों से ऊपर का दिया।

    अंकल अब स्पीड से मुझे चोद रहे थे। मेरा पूरा बदन अकड़ने लगा। मैं अंकल की पीठ पर खरोंचने लगी और फिर एक लंड से फुहार निकाली जिसने बुर को गर्म और गीली कर दी। अंकल शांत होकर मेरे ऊपर पड़े थे। मैं भी निढाल होकर बेसुध पड़ी रही।

    कुछ देर आंख खुली तो देखा 9 बजे गए थे। मां की आवाज आ रही थी और तभी अंकल ने फिर से एक सांट मार दिया।

    ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… अंकल निकालो.. दर्द कर रहा.. ओ मां मुझे नहीं चुदना है.. मुझे जाने दो।’
    ‘बस हो गया.. डार्लिंग अभी तो जन्नत का सुख मिलेगा।’

    मुझे दर्द हो रहा था।

    ‘बस डार्लिंग थोड़ा सब्र करो.. तुम्हारी सील टूट चुकी है, अब जितना चुदवाना हो करवा लेना।’

    कुछ देर बाद हम दोनों अलग हो गए। मैं अन्दर जाकर हाथ-मुँह धोने लगी और अंकल को खाना दिया।
    मैंने अपने हाथ से उन्हें खाना खिलाया और प्यार शुरू हो गया।

    इसके बाद अंकल के संग गाहे-बगाहे चुदने का माहौल बनने लगा और अंकल ने भी मुझे चुदाई का भरपूर प्यार दिया।
    जब तक उनकी पत्नी नहीं आईं.. मैं दो-तीन दिन में एकाध बार बुर चुदाई करवाने लगी।

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