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दो सगी बहनों की एक साथ में चुदाई

वो बड़ा चहकी- तुम बातें बहुत बनाते हो। अच्छा ये बताओ, सुहागरात को भी यही होता है क्या?
मैंने कहा- हाँ, सुहागरात को भी सेक्स ही होता है, और उसके बाद हनीमून पर भी सिर्फ सेक्स और सेक्स होता है।
वो बोली- हमने तो शादी की नहीं, फिर सेक्स करना ठीक है क्या?
मैंने कहा- सेक्स करने के लिए शादी की ज़रूरत नहीं होती।

बेशक मैं उस से बातें कर रहा था, मगर मेरा सारा ज़ोर उसकी चुदाई में लगा हुआ था। पहले तो मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था, मगर फिर मैं उठ कर बैठ गया, उसकी दोनों टाँगें मेरे दोनों कंधों पर थी। बेड की साइड में रखा छोटा सा टेबल लेंप, और उसकी मध्म से रोशनी में दमकता उसका गोरा बदन… मैं कभी उसके होंठ चूसता तो कभी उसके निप्पल।

मेरे ज़ोर ज़ोर से दबाने से उसके दोनों बोबों पर मेरी उँगलियों के निशान छप गए थे।

मैंने कम्बल उतार दिया और अपनी टी शर्ट भी। हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे, इतने में ही उसकी छोटी बहन ने करवट ली और हमारी तरफ मुँह करके हमें देखने लगी।
मैंने अपनी कारवाई नहीं रोकी।
उसने पूछा- दीदी, क्या कर रहे हो?
तो रानी ने बड़ा खुश होकर कहा- सेक्स कर रहे हैं।

सेक्स का नाम सुन कर राजू की आँखें खुल गई, और वो बड़े गौर से हमें देखने लगी। मैंने भी अपना पूरा लंड रानी की चूत से बाहर निकाल कर फिर डालना शुरू किया, ताकि राजू भी देख सके कि लंड कैसे और कहाँ डालता है।
राजू बोली- दीदी शर्म नहीं आती, ऐसे नंगी लेटी हो।
रानी से पहले मैंने कह दिया- अरे सेक्स होता ही नंगे लेट कर है। कपड़े पहन कर सेक्स थोड़े होता है।

कम्बल में दुबकी राजू भी मुझे सुंदर लग रही थी, मेरा तो मन था कि ये भी बाहर निकले और मैं उसे भी चोद दूँ। मगर अभी मुझ सब्र रखना था, ताकि पहले रानी को अपने वश में कर लूँ, उसकी अच्छे से चुदाई कर के।

मैंने रानी से कहा- रानी घोड़ी बनेगी?
तो वो अपना सर हिला कर उठ गई और मेरी तरफ पीठ करके अपने चूतड़ उसने मेरी तरफ कर दिये, मगर मैंने अपना तना हुआ लंड अच्छी तरह से हिला कर राजू को दिखाया, और फिर पीछे से
रानी की चूत में डाला, जिसे रानी ने खुद पीछे को ज़ोर लगा कर सारे का सारा अपनी चूत में ले लिया।
उसके बाद रानी की चुदाई घोड़ी बन के होने लगी।

मैंने रानी से पूछा- रानी मज़ा आ रहा है?
वो बोली- हाँ, बहुत!

मैं उसे चोद रहा था, मगर मेरा ध्यान बार बार राजू पर जा रहा था। मैं चाहता था कि राजू भी अपना कम्बल उतारे और नंगी हो कर हमारे साथ ही आ जाए और मैं उसे भी चोद कर अपने लंड को ठंडा कर सकूँ।
मगर राजू उठी नहीं मगर मुझे इतना ज़रूर पता था कि उसका हाथ उसकी सलवार में है।

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मैंने उसको बेशर्म करने के लिए पूछ ही लिया- ए राजू, तू सलवार में हाथ डाल कर क्या कर रही है?
वो एकदम से चौंक पड़ी, मगर रानी ने उसका कम्बल खींच दिया, सच में राजू का हाथ उसकी सलवार में था, जब उसने अपना हाथ सलवार से बाहर निकाला, तो उसकी उँगलियाँ भीगी हुई थी, मैं समझ गया, साली हमें देख कर अपनी चूत सहला रही थी।

रानी बोली- चिंता मत कर, वक़्त आने पे तुझे भी तेरा बॉय फ्रेंड मिलेगा, फिर तू भी हमारी तरह एंजॉय करना!
मगर मैं मन में सोच रहा था, बॉयफ्रेंड नहीं, इसके साथ तो मैं ही एंजॉय करूंगा।

उस रात हमारी सुहाग रात बहुत अच्छे से गुज़री, मैंने दो बार रानी को चोदा और दोनों बार उसके पेट पर ही अपना माल गिराया।
जहां तक मुझे लगता है कि एक बार तो राजू ने भी अपनी चूत सहला सहला कर अपना पानी छोड़ा होगा।

उसके बाद हर तीसरे चौथे दिन हमारा मिलन होता, अब मैं और रानी खुल कर सेक्स करते। मेरे जाने से पहले ही रानी खुद नंगी हो कर बिस्तर में लेटी होती, मैं रूम में जाता, कपड़े उतारता और नंगा हो कर रानी के कम्बल में घुस जाता।

राजू भी हमसे बातें करती रहती।

जिस रात मैं चौथी बार उनके घर गया, उस रात जब मैंने और रानी ने सेक्स किया, हम तो खैर बिल्कुल नंगे होते थे, और राजू से कुछ भी शर्म नहीं करते थे, मगर उस रात राजू ने कम्बल तो नहीं उतारा मगर सरे आम अपनी चूत का दाना सहला कर हस्तमैथुन किया। मुझे और रानी को साफ साफ दिख रहा था, मैंने राजू से पूछा भी- ये क्या कर रही हो?
तो राजू बोली- आप अपना काम करो, मैं अपना कर रही हूँ।

मैं ये सोच रहा था कि रानी को कैसे कहूँ कि मैं उसकी बहन को भी चोदना चाहता हूँ। पर इतना ज़रूर था कि राजू भी अब पूरी गर्म थी, और चुदने को बेताब थी, पूरी तरह से तैयार थी।

कहानी जारी रहेगी

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