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दो स्कूली चूतों की एकसाथ चुदाई part2

दो स्कूली चूतों की एकसाथ ठुकाई का यह दूसरा पार्ट है। मुझे पता है आपको पहला पार्ट अच्छा ही लगा होता तो ओके लिए मेब जल्द ही दूसरा पार्ट भी ला दिया है ।

जो अभी तक पहला पार्ट नही पढ़ा पार्ट 1 –  दो स्कूली चूतों की एकसाथ चुदाई part1 अभी तक आपने पढ़ा कि दो स्कूल गर्ल सेक्स में काफी खुली हुई थी, मेरी दोस्त बन चुकी थी, आपस में लेस्बीयन सेक्स करती थी, लंड गांड चूत आदि शब्दों का प्रयोग सबके सामने खुले आम करती थी.
समय बीतने के साथ-साथ हम तीनों का तालमेल काफी अच्छा हो गया था।

पर इसी बीच एक घटना हो गई, जिससे मुझे वो मिल गया जिसकी शायद मैंने कल्पना करनी भी छोड़ दिया था। एक दिन जिस हॉस्टल में मैं रहता था, कुछ बाहरी लड़कों और हॉस्टल के लड़कों में बवाल हो गया और हॉस्टल का काफी नुकसान हो गया था, मकान मालिक ने हम सभी को तत्काल हॉस्टल छोड़ने का हुकुम दे दिया, अब मेरे सामने मुसीबत थी कि मैं कहाँ जाऊँ।

मैंने अपनी बात सभी दोस्तों को बताई, मरियम के साथ-साथ दो-तीन ऑफर और मिल गये थे। मैंने तीनों कमरे देखे, मरियम वाला रूम मुझे ज्यादा पसन्द आया, एक तो उसका रूम काफी बड़ा था, दूसरा मरियम साथ थी जिसका मैं सपना देखा करता था और तीसरा रेन्ट भी काफी कम था और सबसे बड़ी बात मेरे खाने के आधे पैसे भी बच रहे थे क्योंकि मरियम के वजह से मुझे उसके घर का खाना भी खाने को मिल रहा था।
मैं शिफ्ट हो गया।

उसके घर में उसकी मां और उससे काफी छोटा एक भाई था जो शायद 7-8 साल का होगा। पिता उसके आर्मी में थे, इसलिये वो घर में कम ही रहते थे।

संडे का दिन था, मैं सामान शिफ्ट करके और खाना खाकर अपने कमरे में सेक्सी स्टोरी जो मैंने अन्तर्वासना.कॉम से प्रिन्ट आउट कर लिया था, उसी को पढ़ रहा था.
हवा आने के लिये मैंने दरवाजा खोल रखा था, कैपरी पहने हुए था। कहानी पढ़ने के कारण कैपरी में मेरा लंड तम्बू की तरह तना हुआ था.

तभी मरियम चुपचाप आई, मैं कहानी पढ़ने में इतना मग्न था कि मैं नहीं जान पाया कि कब मरियम कमरे में आ गई और मुझे स्टोरी पढ़ते हुए देखने लगी. स्टोरी पढ़ते हुए मैं बीच-बीच में अपने लंड को मसल लेता था कि तभी मरियम ने मुझसे वो पेज छीन लिया और मेरे बगल में लेटते हुए बोली- क्यों अंकुश, ऐसा क्या पढ़ रहे हो कि बार-बार अपने लंड को मसल रहे हो।
‘कुछ नहीं!

तभी मेरी तरफ घूमते हुए बोली- अबे भोसड़ी के, अगर कुछ नहीं पढ़ रहे हो तो लंड अपना क्यों मसल रहे हो?
मैंने बात को पलटते हुए कहा- अच्छा ये बताओ, तुम यहाँ क्या कर रही हो?
मम्मी ने कहा है कि ‘मेरा दामाद आया हुआ है, जाओ उससे चुदवा लो।’
कह कर वो जोर-जोर से हँसने लगी।
‘यार मजाक मत कर… नहीं तो वस्तव में चोद दूंगा।’
‘अबे जा, गांड में नहीं है दम और किसी से नहीं है हम कम!’
‘अच्छा तो देख बहन की लौड़ी!’ कहकर मैंने उसे पटक दिया और उसके होंठ को चूसने लगा।

मरियम ने कस कर धक्का दिया और मुझसे अलग होते हुए बोली- क्या रे हरामी, आ गये न अपनी औकात पर?
‘देख अभी तू ही उकसा रही थी। अब बता, तू यहाँ क्यों आई?’
‘अरे यार, सब खाना खा कर सो गये, मुझे नींद नहीं आ रही थी तो सोचा चल कर तेरे पास ही बैठूँ।’ इतना कहने के साथ ही उसने मेरे हाथ को फैलाया और उस पर अपनी गर्दन टिका दी।

‘अब क्या करना है?’ मैंने पूछा तो वो बोली- ला देखूं, तू क्या पढ़ रहा था।
‘यार अन्तर्वासना की एक सेक्सी कहानी पढ़ रहा था।’
‘मतलब?’ वो बोली।
‘तू पढ़ कर देख ले।’

उसने मुझसे पेज लिये और पढ़ने लगी।
कहानी वो जब पढ़ने लगी तो मेरे हाथ उसके गोलाइयों को दबाने लगे, उसने झट से एक चुटकी काटी, मेरा हाथ हट गया, थोड़ी देर बाद मेरे हाथ फिर उसकी गोलाइयों को दबाने लगे, इस बार वो कुछ नहीं बोली और अपनी एक टांग को मेरे ऊपर चढ़ा दी.

मैंने अपने हाथ को उसके गर्दन से निकाला और उसकी तरफ घूम गया और उसकी चूत को सलवार के ऊपर से ही सहलाने लगा.

वो थोड़ा कसमसाई लेकिन मेरी हरकत को नजर अंदाज कर दिया। मैं उसकी चूत को सहला रहा था तो मुझे लगा कि उसने नीचे कुछ पहना नहीं है।
‘मरियम…’ मैंने पूछा- ये बता कि कहानी कैसी लगी?
‘चुप रह, पढ़ रही हूँ।’

मैंने उसके गोलों को और जोर से मसलना शुरू किया।
तभी वो बोली- अंकुश, मेरा दूध पियोगे?
मैं उसकी तरफ देखने लगा तो वो बोली- मेरे मम्मे बाहर कर लो, और मेरा दूध पीओ।

मेरे मन की मुराद पूरी हो रही थी, मैंने उसके कुर्ती से उसके मम्मे को बाहर निकाला, हालाँकि मम्मे पूरे बाहर नहीं आये थे, लेकिन दाना बाहर आ चुका था, मैंने उसके दानो को अपने मुंह में रखा और चूसने लगा लेकिन कपड़े पहने होने के कारण दाना पूरी तरह मुंह में नहीं आ रहा था.
तो मरियम खुद ही बोली- चल आ मेरे कमरे में, वहाँ पर अच्छे से पीना।
कहकर उठी और अपने कमरे की तरफ चल दी।

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मैं भी उसके पीछे-पीछे चल दिया।

कमरे में पहुंचकर उसने कमरे को अन्दर से बन्द किया और मेरी तरफ घूमी, उसकी आँखें लाल हो चुकी थी। उसने अपनी कुर्ती और सलवार उतार दिया, उसने कोई इनर वियर नहीं पहना हुआ था। वो बिस्तर पर लेट गई और अपने मम्मे को दबाते हुए बोली- आओ अंकुश, आओ इसे पियो!

मैंने भी अपने कपड़े उतारे और उसके बगल में लेट गया, मेरा लंड भी तन कर काठ हो चुका था। मैं उसके मम्मे को बारी-बारी से अपनी मुंह में लेता और वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मसल रही थी।
हम लोग अपने प्रोग्राम में लगे थे कि सुधा का फोन आ गया, उसने फोन पर बताया कि वो मरियम के मकान के नीचे ही खड़ी है।
मैं उठा और अपने कपड़े पहनने लगा तो मरियम ने मुझे रोकते हुए कहा- तुम यहीं ठहरो, मैं उसको रफ दफा करके आती हूँ।

मैं उसके कहने पर वहीं रूक गया.

मरियम ने बाहर से दरवाजा बन्द कर दिया, मैं निश्चित होकर नंगा ही पड़ा रहा, हाँ बस अपने ऊपर चादर डाल ली।

थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला, तो मेरा मुंह भौचक्का रहा गया… ये क्या… मरियम के साथ-साथ सुधा भी थी।
मेरे काटो तो खून नहीं…
मैंने सोचा कि मरियम मुझे मरवाकर ही दम लेगी।

तभी मरियम मेरे पास आई और जमीन पर पड़ी हुई अपनी सलवार को उठाकर सुधा को दिखाते हुए बोली- देख, पहली बार बिना कुछ किए ही अंकुश ने मेरा पानी निकाल दिया।
मैं उठ कर बैठ गया, सुधा और मैंने दोनों ने एक दूसरे को हाय कहा, उसके बाद मैंने मरियम से पूछा तो वो बोली- मैंने सुधा को बहुत टरकाने की कोशिश की लेकिन आज इसको मेरी सहेली के साथ खेलने का बहुत मन हो रहा था और जब भी हमसे किसी को भी हमारी सहेली के साथ खेलने का मन होता तो हम पहुंच जाती हैं।
‘ये सहेली कौन?’ मैं आश्चर्य में था.
तभी सुधा बोली- गांडू, हमारी चूत और क्या!

मैं उठा और कपड़े पहनते हुए बोला- तब मैं चलता हूँ, तुम लोग अपनी सहेली के साथ खेलो।
सुधा मुझे रोकते हुए बोली- क्यों अंकुश क्या मैं तुम्हें अच्छी नहीं लगती?
मैं क्या बोलता… तो मैंने बोल दिया- ऐसी कोई बात नहीं है।
‘तो ठीक है, तब रूक जाओ, हमारी सहेलियों को एक दोस्त की भी अब जरूरत है।’

मुझे क्या, साला इतने बवाल के बाद दो-दो मिल रही थी।

तभी उसकी मम्मी की आवाज आई- मरियम, क्या हो रहा है?
वो बोली- मम्मी, सुधा आई है उसी के साथ पढ़ाई कर रही हूँ।

मन ही मन मैंने सोचा कि क्या पढ़ाई है।

अब तक दोनों अपने कपड़े उतार चुकी थी। सुधा के मम्मे मरियम से आकार में थोड़े बड़े थे। मैं दोनों स्कूल गर्ल की नंगी चुत देख रहा था, दोनों की चूत सफाचट थी।
अब हम तीनो ही कमरे के अन्दर नंगे थे।

दोनों मेरे पास आई और दोनों मेरे एक-एक पैर के पास बैठ गई और कभी मरियम मेरे लंड को पकड़ कर उसके सुपारे पर अपनी उंगली फेरती तो कभी सुधा… दोनों सुपारे के कट पर नाखून चलाती जाती.
मैं ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरे लंड ने सफेद तरल पदार्थ (वीर्य) छोड़ दिया और ये वीर्य उनके हथेलियों के ऊपर गिर गया। दोनों लड़कियाँ अपने-अपने हाथ को चाटने लगी।
जब दोनों ने हथेली को चाट लिया तो सुधा बोली- इसके पानी का भी स्वाद तो हम लोगों के पानी की तरह है।

मेरा लंड इस बीच मुरझा चुका था।

तो दोस्तो, मेरी कहानी कैसी लगी? मुझे नीचे दिये ई-मेल पर अपनी प्रतिक्रिया मेरे मेल पर भेजें।
दो स्कूल गर्ल के साथ सेक्स की कहानी जारी रहेगी.

दो स्कूली चूतों की एकसाथ चुदाई part3

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