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“म की चुदाई देख कर मेरी अन्तर्वासना भड़की”

Antarvasna story, hindi sex story, desi kahani, chudai ki kahani, sex kahani हैल्लो दोस्तों| Antarvasna मेरा नाम आशा है और में कानपुर की रहनें वाली हूँ| मेरे घर में मेरे मम्मी| पापा और मेरे दादा| दादी है| में मेरे बाप की एक ही औलाद हूँ| मुझे मेरे माँ बाप नें बड़े प्यार से बड़ा किया है| आज मेरी उम्र 21 साल की है| लेकिन मुझे देखकर कोई कह नहीं सकता कि मेरी उम्र इतनी कम होगी| क्योंकि मेरा बदन बिल्कुल एक 24 साल की लड़की की तरह हो चुका है| मेरा फिगर साईज 34-28-36 है और इसकी वजह में खुद ही हूँ| जो 18 साल की उम्र से ही सेक्स की तरफ ज़्यादा ध्यान देनें लगी थी और लगभग तब से में चूत में उंगली करनें लग गयी थी| मेरे घर में 5 रूम है| एक में मेरे मम्मी पापा और दूसरे में मेरे दादा दादी| जो अब 60 से ज्यादा उम्र के है और ज़्यादातर अपनें कमरे में ही लेटे रहते है और तीसरे में में खुद रहती हूँ और बाकि के दो कमरे हम अलग-अलग कामों के लिए उपयोग में लेते है| मेरे पापा की उम्र 38 साल की है| मेरी माँ वैसे तो बहुत खूबसूरत है| लेकिन बहुत ही पुरानें विचारो वाली एक साधारण औरत है| जो अपना ज़्यादातर वक़्त पूजा पाठ या अपनें सास ससुर की सेवा में और घर के काम काज में गुजारती है| मेरे पापा जो एक बिजनसमैन है और अपना खुद का बिजनेंस चलाते है| हम बहुत अमीर तो नहीं है| लेकिन हमारे घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं है| मेरे पापा भी बहुत हैंडसम है| लेकिन मेरी माँ तो उन्हें टाईम ही नहीं दे पाती है| सिर्फ़ रात में जब उनके सोनें का वक़्त होता है जब ही उनके पास जाती है|

यह बात तब की है| जब मेरी उम्र 18 साल की थी| एक रात हम सब खाना खाकर सोनें के लिए अपनें अपनें रूम में चले गये थे कि तभी अचानक से मुझे लगा कि मेरे मम्मी पापा के रूम से लड़नें की आवाज़े आ रही है| मम्मी पापा का रूम मेरे रूम से ही लगा हुआ था| मुझे ज़िंदगी में पहली बार लगा था कि मम्मी पापा की लड़ाई हो रही है इसलिए में यह जानना चाहती थी कि वो लड़ क्यों रहे है? तो पहले तो मैंनें सोचा कि में मम्मी से जाकर पूंछू| लेकिन फिर बाद में सोचा कि वो लोग मेरे सामनें शर्मिंदा हो जाएगे इसलिए मैंनें पूछना उचित नहीं समझा| लेकिन फिर भी मेरे मन में वजह जाननें की इच्छा तेज होती गयी और जब मुझसे नहीं रहा गया तो मैंनें उठकर देखनें की कोशिश की| मेरे रूम में एक खिड़की थी| जो उनके कमरे में खुलती थी| वो खिड़की बहुत पुरानी तो नहीं थी| लेकिन उसमें 2-3 जगह छेद थे| फिर मैंनें अपनें रूम की लाईट ऑफ की और उस छेद में आँख लगा दी| अब अंदर का नज़ारा देखकर मेरे बदन में करंट सा दौड़ गया था|
अब मेरी मम्मी जो कि सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में थी और बेड पर बैठी थी और मेरे पापा सिर्फ़ अपनी वी-शेप अंडरवेयर में खड़े थे और बार-बार मम्मी को अपनी ब्रा उतारनें के लिए कह रहे थे और मेरी मम्मी उन्हें बार-बार मना कर रही थी| फिर मैंनें देखा कि मेरे पापा की टाँगों के बीच में जहाँ मेरी पेशाब करनें की जगह है| वहाँ कुछ फूला हुआ है| अब मेरी नजर तो बस वही टिक गयी थी और में चाहकर भी अपनी नजर हटा नहीं पा रही थी| अब वो लोग कुछ बात कर रहे थे| लेकिन मेरा ध्यान तो सिर्फ पापा की टाँगों के बीच में ही था और उनकी बातें सुननें का ध्यान भी नहीं था| अब मेरा दिल ज़ोर- ज़ोर से धड़क रहा था और मेरा बदन बिल्कुल अकड़ गया था और इसके साथ ही मुझ पर एक और बिजली गिरी और फिर मेरे पापा नें झटके से अपना अंडरवेयर भी उतार दिया| ओह गॉड मेरी तो जैसे साँसे ही रुक गयी थी| मेरे पापा की टाँगों के बीच में एक लकड़ी के डंडे की तरह कोई चीज लटकी हुई थी| जो कि मेरे हिसाब से 8 इंच लंबी और 3 इंच मोटी थी| उस चीज को क्या कहते है? मुझे उस वक़्त पता नहीं था|
फिर मेरी मम्मी उस चीज को देखकर पहले तो गुस्सा हुई और फिर शर्म से अपनी नजरे झुका ली| अब उन्हें भी मस्ती आनें लगी थी और फिर उन्होंनें इशारे से पापा को अपनें पास बुलाया और उनके उस हथियार को प्यार से सहलानें लगी थी| फिर मम्मी नें अपनी ब्रा उतारी और अपनें पेटीकोट का नाड़ा खोला और फिर बिल्कुल नंगी होकर सीधी लेट गयी और अपनी टांगे खोलकर पापा को अपनी चूत दिखाई और इशारे से उन्हें पास बुलानें लगी थी| फिर मेरे पापा कुछ देर तक तो गुस्से में सोचते रहे और फिर जैसे अपना मन मारकर उनके ऊपर उल्टे लेट गये और अपनें एक हाथ से अपना लंड पकड़कर मम्मी की चूत में डाला और हिलते हुए मम्मी को किस करनें लगे थे और फिर लगभग 10 मिनट तक हिलनें के बाद वो शांत हो गये और ऐसे ही पड़े रहे|
फिर थोड़ी देर के बाद मम्मी नें उन्हें अपनें ऊपर से हटाया और अपनें कपड़े पहनें और लाईट बंद करके सोनें के लिए लेट गयी| अब कमरे में बिल्कुल अंधेरा होनें की वजह से मुझे कुछ नहीं दिख रहा था| तो तब मैंनें भी जाकर लेटनें की सोची और फिर में भी अपनें बिस्तर पर आकर लेट गयी| लेकिन अब मेरी आँखों के सामनें तो मम्मी पापा की पिक्चर चल रही थी और पापा का वो भयानक हथियार पता नहीं मुझे क्यों बहुत अच्छा लग रहा था? अब मेरा दिल कर रहा था कि में भी उनके हथियार अपनें हाथ में लेकर देखूं| उस रात मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही थी| फिर मैंनें उस रात पहली बार हस्तमैथुन किया| अब मेरे ख्यालों में और कोई नहीं बल्कि मेरे पापा ही थे| फिर जब मेरी चूत का रस निकला| तो तब में इतनी थक चुकी थी कि कब मेरी आँख लग गयी? मुझे पता ही नहीं चला| फिर सुबह मम्मी नें जब आवाज लगाई तो मेरी आँख खुली| फिर मम्मी बोली कि बेटा सुबह के 7 बज रहे है| स्कूल नहीं जाना है क्या? तो तब में उठकर सीधी बाथरूम में गयी और नहानें के लिए अपनें कपड़े उतारे|

फिर तब मैंनें देखा कि मेरी पेंटी पर मेरी चूत के रस का धब्बा अलग ही दिख रहा है| अब मेरी आँखों के सामनें फिर से वही नज़ारा आ गया था| अब मुझे फिर से मस्ती आनें लगी थी तो मैंनें फिर से अपनी चूत में उंगली करनी चालू कर दी और तब तक करती रही जब तक कि में झड़ नहीं गयी| दोस्तों मुझे इतना मज़ा आया था कि में यह सोचनें लगी कि जब उंगली करनें में ही इतना मज़ा आता है तो सेक्स में कितना मज़ा आता होगा? और फिर में अपनें पापा के साथ ही यह मज़ा लेनें की सोचनें लगी और सोचनें लगी कि कैसे पापा के साथ मज़ा लिया जाए? खैर जैसे तैसे करके में स्कूल जानें के लिए तैयार हुई और ड्रेस पहनकर बाहर आई तो नाश्ते की टेबल पर मेरा पापा से सामना हुआ| में रोज सुबह पापा को गुड मॉर्निंग किस करके विश करती थी| तो तब मैंनें उस दिन भी पापा को किस करके ही विश किया| लेकिन इस बार मैंनें कुछ ज़्यादा ही गहरा किस किया और थोड़ा अपनी जीभ से उनके गाल को थोड़ा चाट लिया| जिससे मेरे पापा पर कुछ असर तो हुआ| लेकिन उन्होंनें मेरे सामनें ज़ाहिर नहीं किया था|
अब में उनके ठीक सामनें जाकर कुर्सी पर बैठकर नाश्ता करनें लगी थी और फिर नाश्ता करनें के बाद में स्कूल की बस पकड़नें के लिए बाहर जानें लगी| लेकिन मेरा मन पापा को छोड़कर जानें का नहीं हो रहा था| तो तब में बाहर तो गयी| लेकिन कुछ देर के बाद वापस आकर मैंनें बहाना बनाया की मेरी बस निकल चुकी है| अब ऐसी स्थिति में पापा मुझे स्कूल छोड़कर आया करते थे| तो तब मम्मी बोली कि जा पापा से कह दे| वो तुझे स्कूल छोड़ आएँगे| फिर में खुशी-खुशी पापा के कमरे में गयी| अब पापा सिर्फ़ अपनें पजामे में थे| फिर मैंनें पापा से कहा तो वो मुझे स्कूल छोड़नें के लिए राज़ी हो गये| अब पापा अपनी पेंट पहननें लगे थे| फिर मैंनें उनके हाथ से पेंट लेते हुए कहा कि पापा पजामा ही रहनें दीजिए| में लेट हो रही हूँ| तो तब पापा बोले कि ठीक है| में टी-शर्ट तो पहन लूँ| तू मेरा बाहर इन्तजार कर| तो में बाहर आकर इन्तजार करनें लगी|
पापा मुझे ज़्यादातर स्कूल कार में ही छोड़ते थे| लेकिन उस दिन मेरे कहनें पर उन्होंनें मुझे हमारी एक्टिवा स्कूटर पर स्कूल छोड़नें के लिए गये| दोस्तों यहाँ तक तो मेरा प्लान सफल रहा था| लेकिन आगे के प्लान में थोड़ा खतरा था और मुझे यकीन नहीं था कि वो सफल हो जाएगा| फिर में उनके पीछे बैठ गयी और फिर हम स्कूल की तरफ चल दिए| मेरा स्कूल घर से लगभग 10 किलोमीटर दूर था| रास्ता लंबा था और सुबह का वक़्त था| तो रोड सुनसान थी| फिर जब हम घर से 2 किलोमीटर दूर आ गये| तो तब मैंनें पापा से कहा कि गाड़ी में चलाऊँगी| तो तब पापा बोले कि बेटी तुझसे गाड़ी नहीं चलेगी| तो में तो ज़िद्द करनें लगी| तो तब पापा परेशान होकर बोले कि ठीक है| लेकिन हैंडल में ही पकडूँगा| अब मुझे मेरा प्लान कामयाब होता दिख रहा था|
फिर तब मैंनें कहा कि ठीक है और पापा नें गाड़ी साईड में रोककर मुझे अपनें आगे बैठाया और मेरी बगल में से अपनें दोनों हाथ डालकर हैंडल पकड़ा और धीरे-धीरे चलानें लगे| लेकिन अब गाड़ी चलानें में किसका ध्यान था? अब मेरा ध्यान तो पापा के पजामे में लटके उनके लंड पर था| तो तभी गाड़ी जैसे ही खड्डे में गयी| तो मैंनें हिलनें का बहाना करके उनका लंड ठीक मेरी गांड के नीचे दबा लिया| अब पापा कुछ अच्छा महसूस नहीं कर रहे थे| अब में अपनी गांड को उनके लंड पर रगड़नें लगी थी| अब गर्मी पाकर उनका लंड धीरे-धीरे खड़ा होनें लगा था| जिससे मुझे भी मस्ती आनें लगी थी| अब पापा को भी मज़ा आ रहा था और फिर इस तरह मस्ती करते हुए में स्कूल पहुँच गयी| फिर पापा को जाते वक़्त मैंनें एक बार फिर से किस किया| अब पापा शायद मुझे लेकर कुछ परेशान हो गये थे और में मेरी तो पूछो मत| मेरी हालत तो इतना करनें में ही बहुत खराब हो गयी थी और मेरी पेंटी इतनी गीली हो चुकी थी कि मुझे लग रहा था मेरी स्कर्ट खराब ना हो जाए| दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है|
फिर पूरे दिन स्कूल में मेरे दिमाग में पापा का लंड ही घूमता रहा और अब मेरा दिल कर रहा था कि में पापा के लंड पर ही बैठी रहूँ| अब पता नहीं मुझे क्या हो गया था? ऐसा कौन सा वासना का तूफान मेरे अंदर था कि में पापा से चुदनें के लिए ही सोचनें लगी थी| खैर आगे बढ़ते है| फिर में चुदाई की इच्छा और गीली पेंटी लेकर घर पहुँची| अब उस वक़्त लगभग 3 बज रहे थे| अब घर में दादा| दादी के अलावा कोई नहीं था| मम्मी कहीं गयी हुई थी और पापा अपनें ऑफिस में थे| ख़ैर फिर में बाथरूम में गयी और गंदे कपड़ो में से पापा की अंडरवेयर ढूंढकर अपनी चूत पर रगड़ते हुए हस्तमैथुन किया| अब मुझे बहुत मज़ा आया था और फिर में सो गयी| फिर मेरी आँख खुली तो शाम के 5 बज रहे थे| फिर मैंनें नहा धोकर कपड़े पहनें और मैंनें कपड़े भी उस दिन कुछ सेक्सी दिखनें वाले पहनें थे| मैंनें एक शॉर्ट स्कर्ट और फिटिंग टी-शर्ट पहनी थी| अब पापा के आनें का टाईम हो गया था| लेकिन मम्मी का कोई पता नहीं था
फिर शाम के 6 बजे पापा नें घंटी बजाई तो में दौड़ती हुई गयी और दरवाजा खोला| फिर पापा मुझे देखकर थोड़े मुस्कुराए और मुझे गले लगाकर मेरे गालों पर किस करते हुए बोले कि बेटा आज तो बहुत स्मार्ट लग रही हो| अब मुझे इतनी खुशी हुई थी कि में पापा को फंसानें में धीरे-धीरे सफल होती जा रही थी| फिर अंदर आकर पापा नें चाय का ऑर्डर कर दिया तो में किचन में जाकर चाय बनानें लगी| फिर पापा भी फ्रेश होकर किचन में आ गये और इधर उधर की बातें करनें लगे थे| फिर थोड़ी देर में पापा मेरी गोरी जांघो देखकर गर्म हो गये और मेरे पीछे खड़े होकर अपना लंड मेरी गांड से सटानें की कोशिश करनें लगे थे| तब में भी अपनी गांड को उनके लंड पर रगड़नें लगी| अब मुझे तो ऐसा लग रहा था कि जैसे में जन्नत में हूँ और बस ऐसे ही खड़ी रहूँ|

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ख़ैर अब चाय बन चुकी थी और फिर मैंनें पापा से डाइनिंग रूम में जाकर बैठनें को कहा और चाय वहाँ सर्व करके बाथरूम में जाकर फिर से उंगली करनें लगी थी| फिर में झड़नें के बाद बाहर आई| तो तब तक मम्मी भी आ चुकी थी| मुझे मम्मी पर बहुत गुस्सा आया| क्योंकि मुझे पापा से अभी और मज़ा लेना था और मम्मी के सामनें में कुछ नहीं कर सकती थी| अब पापा भी मम्मी के आनें से थोड़े दुखी हो गये थे| क्योंकि ना तो वो कुछ करती थी और ना ही उन्हें कुछ करनें देती थी| अब पापा मुझे देखकर बार-बार अपना लंड पजामे के ऊपर से ही सहला रहे थे और मुझे भी उन्हें सतानें में बहुत मज़ा मिल रहा था| फिर खाना खानें के बाद पापा मुझसे बोले कि बेटी चल थोड़ा घूमकर आते है और मुझे लेकर घर के बाहर आ गये| फिर बाहर आकर उनका मूड चेंज हुआ और मुझसे बोले कि चल बेटा पिक्चर देखनें चलते है| तो तब मुझे पापा पर इतना प्यार आया कि पापा मेरे साथ अकेला रहनें की कितनी कोशिश कर रहे है? खैर फिर हम एक्टिवा पर सवार होकर एक सिनिमा में पहुँच गये और रास्ते में ही मम्मी को फोन कर दिया कि हम पिक्चर देखनें जा रहे है| जब सिनिमा में कोई पुरानी मूवी लगी होनें की वजह से ज़्यादा भीड़ नहीं थी| पूरे हॉल में लगभग 30-40 लोग ही होंगे|

अब मुझे पापा की समझदारी पर बहुत खुशी हुई थी| वो चाहते तो मुझे किसी बढ़िया पिक्चर दिखानें ले जाते| लेकिन उन्हें शायद कुछ ज़्यादा मज़े लेनें थे| फिर उन्होनें सबसे महेंगे टिकट लिए और फिर हम लोग बालकनी में जाकर बैठ गये| हमारा नसीब इतना बढ़िया चल रहा था की बालकनी में सिर्फ़ हमारे अलावा सिर्फ़ एक ही लड़का था| जिसकी उम्र लगभग 18 साल थी और वो भी आगे की सीट पर बैठ गया था| अब तो हम दोनों को और भी आराम हो गया था| फिर पिक्चर चालू हुई| लेकिन पिक्चर पर तो किसका ध्यान था? अब मेरा दिमाग तो पापा के लंड की तरफ था और पापा भी तिरछी नजर से मेरी छोटी-छोटी चूचीयों की तरफ देख रहे थे| अब बस शुरुआत करनें की देर थी कि कौन करे? अब में तो पापा का स्पर्श पानें के लिए वैसे ही मरी जा रही थी और फिर उसी वक़्त जैसे बिल्ली के भागों छिका टूटा हो| मेरे पैर पर किसी जानवर नें काटा हो| में उउउइई करती हुई खड़ी हो गयी|
फिर तब पापा नें घबराते हुए पूछा कि क्या हुआ? तो तब मैंनें बताया कि मेरे पैर पर किसी कीड़े नें काटा है| तो तब पापा बोले कि बैठ जा और अब काटे तो तुम मेरी सीट पर आ जाना| तो में बैठ गयी और फिर 5 मिनट के बाद फिर से उछलती हुई खड़ी हो गयी| लेकिन इस बार मुझे किसी नें काटा नहीं था बल्कि में जानबूझकर खड़ी हुई थी| खैर फिर पापा हंसते हुए बोले कि तू मेरी सीट पर आ जा| फिर तब में बोली कि पापा कोई बात नहीं जैसे उस कीड़े नें मुझे काटा है| ऐसे ही आपको भी काट लेगा| तो तब पापा बोले कि तू एक काम कर मेरी गोद में बैठ जा| अब में तो पहले से ही तैयार थी तो पापा के बोलते ही में उनकी गोद में बैठ गयी और पर्दे की तरफ देखनें लगी थी| अब में उनकी गोद में बैठी हुई बिल्कुल छोटी सी लग रही थी| मेरी उम्र उस वक़्त 18 साल ही तो थी|
अब पापा मेरी गर्मी पाकर गर्म होनें लगे थे| अब उनका लंड फिर से खड़ा होनें लगा था| अब मुझे भी उनके लंड पर बैठना बहुत अच्छा लग रहा था| वैसे तो हमारी नजर पर्दे की तरफ थी| लेकिन ध्यान सिर्फ़ अपनी-अपनी टाँगो के बीच में था| अब मेरा तो बदन जैसे किसी भट्टी की तरह तप रहा था| अब मेरी स्कर्ट में मेरी चड्डी बिल्कुल गीली हो रही थी| अब पापा का लंड ठीक मेरी गांड के छेद पर था और पापा धीरे-धीरे मेरा पेट सहला रहे थे| अब मेरा मन कर रहा था कि पापा अपना लंड ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूत पर रगड़ दे| लेकिन ऐसा नहीं हो सकता था| क्योंकि हम दोनों ही एक दूसरे से शर्मा रहे थे| खैर फिर कुछ देर तक ऐसे ही बैठे रहनें के बाद मैंनें अपनें हाथ में पानी की बोतल थी वो नीचे गिरा दी और फिर उसको उठानें के लिए झुकी तो पापा का लंड बहानें से अपनी चूत पर सेट किया और फिर सीधी बैठकर मज़े लेनें लगी| अब 1 घंटा 30 मिनट निकल गये थे और हमें पता ही नहीं चला कि कब इंटरवेल हुआ?

फिर पापा मुझे पैसे देते हुए बोले कि कैंटीन से जाकर कुछ ले आओ तो में बाहर गयी और कैंटीन से कुछ खानें की चीज़े खरीदी और फिर टॉयलेट में चली गयी और फिर जब तक वापस आई तो पिक्चर चालू हो चुकी थी| फिर मैंनें पापा की गोद में बैठते हुए कहा कि पापा मुझे आपकी गोद में बैठनें में ज़्यादा मज़ा आ रहा है| फिर तब पापा बोले कि तो फिर 1 मिनट रुक और बैठे हुए ही अपनें लंड को सेट करनें लगे थे| अब मुझे अंधेरे में कुछ नहीं दिख रहा था और फिर जब उन्होंनें मुझे बैठनें को कहा| तो उन्होंनें अपना हाथ कुछ इस तरह से मेरी स्कर्ट पर लगाया कि मेरी स्कर्ट ऊपर हो गयी और में उनकी गोद में फिर से बैठ गयी| फिर थोड़ी देर के बाद मुझे अहसास हुआ कि पापा नें अपना लंड अपनी पेंट में से बाहर निकाल रखा है और इस अहसास के साथ ही जैसे मेरे बदन नें एक तगड़ा झटका लिया और अब मेरा भी मन अपनी चड्डी उतारकर पापा का लंड मेरी चूत से चिपकानें का करनें लगा था|
फिर उसके लिए मैंनें फिर से एक प्लान बनाया और मेरे हाथ में कोल्डड्रिंक का जो गिलास था| उसे अपनी जांघों पर उल्टा दिया तो सारी कोल्डड्रिंक मेरे पैरो और चड्डी पर गिर गयी| तो तब पापा चौंकते हुए बोले कि यह क्या किया? तो तब मैंनें कहा कि सॉरी पापा गलती से हो गया| में तो पूरी गीली हो गयी और मेरे कपड़े भी गीले हो गये| तो तब कपड़ो का मतलब समझते हुए पापा बोले कि जा और टॉयलेट में जाकर साफ कर आ और कपड़े ज़्यादा गीले हो तो उतारकर आ जाना| जल्दी सूख जाएँगे| अब मेरा मन पापा को छोड़नें का नहीँ था| तो मैंनें वहीं खड़े होकर मेरी चड्डी उतारी और दूसरी सीट पर रखी और फिर से पापा के लंड पर बैठकर पापा के लंड को अपनी दोनों टाँगों के बीच में ले लिया| अब उनका लंड बिल्कुल मेरी चूत पर था| अब मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई गर्म लोहे की रोड मेरी जांघों में दबी पड़ी है| अब तो मेरा मन कर रहा था कि जल्दी से पापा अपना लंड मेरी चूत में डालकर ज़ोर से रगड़ दे| लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते थे|
अब मेरी बारी थी| फिर मेरा मन अपनी चूत को उनके लंड पर रगड़नें का हुआ तो तब में अपनी चड्डी उठानें के लिए झुकी और ज़ोर से अपनी चूत पापा के लंड पर रगड़ दी और फिर ऐसे ही 3-4 बार ज़ोर से रगड़ी| तो तब मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरा पानी निकल जाएगा| अब में कभी किस बहानें से तो कभी किस बहानें से हिलती और अपनी चूत पापा के लंड पर रगड़ देती थी| अब पापा समझ गये थे कि मेरा मन रगड़नें का हो रहा है| तब पापा नें मेरे पेट पर अपना एक हाथ रखकर दबाया और अपना जूता खोलनें के बहानें से कभी खुजानें के बहानें से अपना लंड रगड़नें लगे थे| फिर कुछ ही देर में मुझे लगा कि जैसे मेरे जिस्म में से सारा खून फटकर मेरी चूत में से निकलनें वाला है और फिर इसी के साथ मेरा पानी झड़ गया| अब में बिल्कुल ठंडी हो चुकी थी| लेकिन पापा नें 2-3 बार और अपना लंड रगड़ा और फिर पापा भी जैसे अकड़ से गये और उनका भी पानी निकलकर मेरी चूत और मेरे पेट पर फैल गया|

अब हम दोनों बिल्कुल शांत थे और बहुत थक गये थे| फिर 5 मिनट के बाद ही पिक्चर ख़त्म हो गयी और लाईट जलती इससे पहले ही मैंनें अपनी चड्डी यह कहते हुए पहन ली कि अब वो सूख चुकी है| अब दोनों पिक्चर ख़त्म हो चुकी थी एक जो पर्दे पर चल रही थी और एक जो हम बाप बेटी के बीच में चल रही थी| फिर थोड़ी देर के बाद लाईट जली और फिर हम दोनों हॉल से बाहर निकले| फिर बाहर आकर पापा मुस्कुराते हुए बोले कि पिक्चर कैसी लगी? तो तब मैंनें जवाब दिया कि इससे बढ़िया पिक्चर मैंनें आज तक नहीं देखी| तो तब पापा बोले कि मेरे साथ घूमा करेगी तो और भी बढ़िया चीज़े देखनें को मिलेंगी और फिर में मस्कुराती हुई गाड़ी पर बैठ गयी और फिर हम घर की तरफ चल पड़े |

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