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प्यारी भाभीजी की पड़ोसन को भी चोदा

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जैसे कि आपने अब तक पढ़ा था की जब मै भाभीजी के घर से निकला, तो उनकी एक पड़ोसन ने मुझे देख लिया था।
दोस्तो, वो पड़ोसन एक 20 साल की लड़की थी जिसका नाम रौशनी था, यह काल्पनिक नाम है। क्योंकि मै किसी की गोपनीयता को भंग करना नहीं चाहता हु।

मैने आपसे पिछली कहानी में कहा था कि अगली कहानी में इस पड़ोसन की चुत चुदाई के बार में लिखूँगा सो आप इस रौशनी रानी की पूरी दास्तान का मजा लीजिए।

Bhabhi ko choda

उस दिन जब मैने रौशनी को मुझे देखते हुए देख लिया तो सुबह मैने भाभीजी को फोन पर बताया कि रौशनी ने मुझे आपके घर से निकलते हुए देख लिया था।
भाभीजी बोली- करवा दिया कबाड़ा, तुम देख कर नहीं निकल सकते थे? चल कोई बात नहीं, मै समझा दूँगी उसे,
मैने कहा- ठीक है। मेरी जान, अभी फिर से आ जाऊँ, अगर अकेली हो तो?
भाभीजी बोलीं- नहीं, आज नहीं, रात का तो शरीर टूटा हुआ है, अभी रहने दे फिर देखती हु।

मैने ‘ओके जान’ कहकर फोन काट दिया।
फिर 15 दिन तक भाभीजी की चुत मारने का कोई मौका नहीं मिला।

हमारे खेत की कुछ जमीन भाभीजी के घर के साथ लगती थी, तो पापा ने वहाँ एक घर बनाने की सोच रखी थी। कुछ दिन बाद वहाँ हमने काम शुरू करवा दिया, अब मै ज्यादातर वहीं रहने लगा।
लेकिन भाभीजी की चुदाई का मौका नहीं मिल पा रहा था, यूँ ही बस कभी उनकी चूचियाँ दबा देता, कभी होंठ चूस लेता।

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इतने दिन मकान का काम लगे हो गए थे, पर रौशनी नहीं दिख रही थी।
मैने भाभीजी से पूछा, तो भाभीजी ने बताया- आजकल वो अपने मामा के घर गई है, वो उसी दिन चली गई थी जब उसने तुम्हें मेरे घर से निकलते देखा था।

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जिस दिन मैने भाभीजी से रौशनी के बारे में पूछा था उसके दो दिन बाद रौशनी वापस आ गई।
मैने उसे देखा वो एक चुस्त पजामी, हरा कुरता पहने हुए गाण्ड मटका कर सीढ़ियाँ चढ़ रही थी।

चलिए आपको पहले रौशनी के बारे में कुछ बता देता हु।

मेरे घर के दाईं ओर भाभीजी का घर है, तथा बाईं ओर रौशनी का घर है, रौशनी के घर के लोगों का रहना खाना-पीना सोना सब ऊपर की मंजिल में ही था।
उसके परिवार में चार सदस्य हैं, वो, उसका छोटा भाई उसकी माँ, और बाप, रौशनी और उसकी माँ ऊपर और उसका बाप और भाई नीचे सोते हैं।

रौशनी के चुतड़ थोड़े चौड़े और चूचियाँ ऊपर को उठी हुई हैं, कुल मिलाकर उसकी चाल से ऐसा लगता था कि उसकी चुत को एक बड़े लौड़ा की जरूरत थी।
रौशनी भी सीढ़ियों से ऊपर-नीचे जाते समय मुझे देखती रहती थी, पर साली भाव भी बहुत खाती थी।

एक दिन वो शाम को छत पर एक किताब लेकर बैठी थी। वो कभी मेरी और देखती, कभी किताब में देखने लगती,
मैने उसे आँख मार दी और फोन नम्बर का इशारा किया।

तो उसने हाथ हिला कर मना कर दिया, फिर मैने मौका देख कर कागज पर अपना नम्बर लिखकर उसकी तरफ फेंक दिया, पर उसने मेरा नम्बर लिखा हुआ कागज मुझे दिखाते हुए फाड़ दिया और अन्दर चली गई।
मुझे गुस्सा तो बहुत आया, पर क्या करता।
अब मैने सोच लिया था कि इसकी तरफ देखूँगा भी नहीं और मैने उसकी तरफ देखना बंद कर दिया।

वो रोज शाम को छत पर किताब लेकर बैठ जाती। कोई 3-4 दिन के बाद शाम के करीब पांच बजे के आस-पास मै उनकी दीवार के पास कुर्सी डाल कर बैठा था, तभी एक कागज का टुकड़ा मेरे आगे गिरा, मैने वो उठाया तो उस पर ‘सॉरी’ लिखा था,’ साथ में लिखा था ‘कॉल मी प्लीज, नीचे नम्बर लिखा हुआ था।

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एक मैने ऊपर देखा, तो रौशनी देख रही थी।
मैने भी वो कागज फाड़ दिया और कुछ देर बाद घर आ गया।

अगले दिन मै दोपहर को अपने नए बन रहे घर की तरफ जा रहा था, तो मैने देखा कि भाभीजी का ससुर रोहतक जा रहा है, भाई भी नहीं थे।
कुछ देर बाद मै चारों ओर देख कर भाभीजी के घर में घुस गया, अन्दर जाकर देखा कि भाभीजी बिस्तर पर सो रही हैं।
मै अन्दर जाते ही भाभीजी के ऊपर गिर गया, भाभीजी चौंक कर एकदम उठ गईं।

फिर बोलीं- आवाज नहीं दे सकते थे, मै डर गई?
मै बोला- जान ये आवाज देने का टाइम नहीं है,
मै उनके होंठों को चूसने लगा।

भाभीजी भी मेरा पूरा साथ देने लगीं, तभी भाभीजी को ध्यान आया कि दरवाजा खुला है।
भाभीजी ने मुझे हटाया और कहा- मरवाओगे तुम तो, दरवाजा खुला है, रूको मै बंद करके आती हु।

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भाभीजी उठकर दरवाजा बंद करने चली गईं और मै भी उठकर लौड़ा पर वैसलीन लगाने लगा।
तभी भाभीजी की आवाज आई- आ जा रौशनी, बहुत दिन में आई।

यह सुनते ही मैने लौड़ा को वापस पैंट में डाल लिया और मन ही मन कहा- हो गया खड़े लौड़ा पर धोखा।
मै सोफे पर बैठ गया और रौशनी अन्दर आ गई, वो दोनों बिस्तर पर बैठ गईं।
रौशनी बिल्कुल मेरे सामने थी और भाभीजी की पीठ मेरी ओर थी।

रौशनी और भाभीजी आपस में हँसी- मजाक कर रही थीं और बीच में मै भी कुछ मजाक कर रहा था।

फिर थोड़ी देर में लाइट आ गई और रौशनी ने टीवी चला लिया। भाभीजी लेट गई और बोलीं- तुम टीवी देखो, मै कुछ देर सो रही हु, जाते टाइम टीवी बंद कर देना।

इतना कह कर भाभीजी करवट लेकर सो गईं। करीब 5 मिनट बाद मै भी जाने लगा। मै उठकर मुड़ा ही था कि रौशनी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरा गाल चूम कर धीरे से ‘सॉरी’ कहा।
मैने धीरे से कहा- कोई बात नहीं,
मै भी उसके होंठ चूमने लगा।

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वो कुछ शर्मा रही थी, लेकिन थोड़ी देर में वो भी होंठ चूमने लगी।
फिर मैने उसे सोफे पर लिटा दिया और मैने भी सोफे पर बैठकर रौशनी का सिर गोद में ले लिया और हमने चूमना शुरू कर दिया।

अब तो रौशनी पूरे जोश में आने लगी, हमारी जीभें भी आपस में लिपट गई थीं, ये सब बिल्कुल चुपके से हो रहा था।
अब मेरे हाथ रौशनी की चूचियों पर चला गया, उसकी अमरूद के साइज की चूचियां थीं।

कुछ ही देर में मेरा लौड़ा अकड़ कर दर्द करने लगा।
मैने रौशनी से कहा- स्वीटी, एक काम कर दो।
उसने कहा- क्या काम?
मैने लौड़ा की तरफ़ इशारा करते हुए कहा- इसे ठंडा कर दे,
मैने पैंट की जिप खोल दी।

लौड़ा के बाहर निकलते ही वो ध्यान से देखने लगी। मैने उसका एक हाथ लौड़ा पर रखकर खुद ही उसके हाथ को आगे-पीछे करने लगा, उसने आखें बंद कर लीं।

मैने धीरे से कहा- अब मै अपना हाथ हटाता हु, तुम अब अपना हाथ हिलाना,
मैने पाना हाथ हटा दिया और वो धीरे-धीरे हिलाने लगी।

मेरा लौड़ा आग उगलने को तैयार हो गया था और कुछ ही पलों में मेरा माल निकल गया। मेरा सारा माल उसके कपड़ों और हाथ पर गिर गया।
उसने अपनी चुन्नी से हाथ व कपड़े पोंछे।
मैने भी भाभीजी के बिस्तर की चादर से लौड़ा पोंछ लिया।

फिर मै रौशनी के पास बैठ गया और हल्के-हल्के से उसकी चूचियाँ दबाने लगा।

मै धीरे से बोला- स्वीटी, आज रात को तुम अपने घर के पीछे वाले खेत में आ जाना।
वो बोली- नहीं आ सकती, माँ साथ ही सोती हैं।
मै बोला- तुझे आना होगा, मेरी कसम।
वो बोली- कोशिश करूँगी।

फिर मैने उसे अपना नम्बर दिया और कहा- मै घर जा रहा हु, रात को यहीं आऊँगा सोने, और खेत में आते ही मुझे फोन करना,।
उसने ‘ओके’ कहा और मै घर चला आया और रात होने का इन्तजार करने लगा।

रात को 8 बजे मैने खाना खाया और एक छोटी शीशी में सरसों का तेल डालकर नए घर पर आ गया।
नींद तो जैसे कोसों दूर थी। मैने बाहर खाट डाली और लेट गया और उसके फोन का इन्तजार करने लगा। उसके रसीले चूचों की सोचते-सोचते मेरा लौड़ा खड़ा हो गया और मै लेटे-लेटे मुठ मारने लगा।
अपना माल निकालने के बाद पेशाब करके मै सो गया।

फिर अचानक मेरी आँख खुली, तो मैने देखा कि मेरे फोन में दो मिस काल पड़ी हैं… मैने काल किया तो रौशनी बोली- उठ जा कुंभकर्ण, मै खेत में आ रही हु, पांच मिनट में आ जा वहाँ।
मैने ‘ओके’ कहा और चल दिया ठिकाने पर।

थोड़ी देर में वो आई, तब तक मैने धान की पुआल बिछा कर बिस्तर बना दिया था।

उसके आते ही मैने उसके गाल पर पप्पी ली और कहा- लेट जाओ।
वो लेट गई, और मै उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठों को चूसने लगा। कुछ ही पलों में वो मेरा खुल कर साथ दे रही थी, कभी वो मेरे ऊपर, कभी मै उसके ऊपर चढ़ जाते रहे।

कुछ समय बाद मैने उसका कुरता उतार दिया और उसकी चूचियाँ चूसने लगा।
रौशनी ‘आईईईई… सीसीहीई,’ की आवाज करने लगी।

मै कभी उसकी उसकी पूरी चूची को मुँह में लेने की कोशिश करता, कभी हल्के से काट लेता।
वो लगातार सिसकारियाँ ले रही थी ‘आआउह, राज, आआ,ई, मुझे कुछ हो रहा है, आईईई, उउउईई,’
मादक आवाज करते हुए वो अपने चुतड़ हिलाने लगी, वो शायद उत्तेजनावश इतने में ही झड़ गई थी।

मै उसे चूमते-चूमते उसकी नाभि को अपनी जीभ से चोदने लगा।
रौशनी बोली- ओह, राज कितने अच्छे हो तुम,
वो फिर से गर्म होने लगी, मैने धीरे से उसकी सलवार उतार दी और उसकी जांघों को चाटने लगा। रौशनी की सांसें तेज होने लगीं। मैने भी एक हाथ से अपने लोवर को नीचे करके लौड़ा को आजाद कर दिया।

रौशनी का बुरा हाल था, वो कहने लगी- राज, आह, उउहह, पागल ही कर दोगे क्या आज,
मै बोला- जानू प्यार करने वाले पागल होते हैं।

मैने उसकी चुत में उंगली डाल दी, उसने थोड़ी दर्द की आवाज की ‘आआइइइ,’
मैने भी सोचा कि अब इसकी चुत चोद देनी ही चाहिए।
मै उसके साइड में लेट गया और एक हाथ से उसकी चूची दबाने लगा और उसके हाथ में तेल की शीशी देकर कहा- डार्लिंग, तुम तेल निकाल कर मेरे लौड़ा पर लगाओ।

वो तेल निकाल कर मेरे लौड़ा पर लगाकर उसकी मुठ मारने लगी।
मै देर करने के मूड में नहीं था, सो मै उसके ऊपर चढ़ गया और लौड़ा का टोपा उसकी चुत पर लगा दिया।
मैने उसके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया… और एक धक्का लगाया, तो लौड़ा का टोपा चुत में घुसता चला गया।

रौशनी हाथ-पैर पटकने लगी, तो मैने एक जोर का धक्का फिर से मारा, मेरा आधा लौड़ा चुत को चीरता हुआ अन्दर घुसता चला गया। शुक्र था कि मैने उसके होंठ अपने होंठों में ले रखे थे, नहीं तो उसकी चीख से आज मै फंस जाता।

रौशनी की आँखें बाहर आ गई थीं, मैने बिना रुके एक धक्का और लगाया, तो मेरा पूरा लौड़ा उसकी छोटी सी चुत में फिट हो गया।
मै उसके होंठ छोड़ कर उसके कान के पीछे काटने लगा और हल्के झटके मारने लगा।
रौशनी लगातार रो रही थी।

अब मै उसके चूचे दबाने लगा, वो भी अब नीचे से चुतड़ हिलाने लगी।
मै उसके आँसुओं को चाट गया और झटके लगाने लगा।
रौशनी अब मस्त होने लगी और कहने लगी- आहह, उईई, उह, करो और तेज से, उईई, उउहह, करो,

मै भी फुल स्पीड से उसको चोदने लगा, जब मेरा पूरा लौड़ा अन्दर घुसता तो वो दर्द भरी सिसकारी लेती।
थोड़ी देर में रौशनी की सिसकी तेज हो गईं- आआहह, राज, आहह,
वो पूरे लौड़ा को अन्दर जकड़ने की कोशिश करते हुए झड़ गई।
मैने भी झटके तेज कर दिए और 8-10 झटकों में अन्दर ही झड़ गया।

फिर हम दोनों ने थोड़ी देर चूमा-चाटी की और मैने रौशनी को कपड़े पहनाए। उसकी चुत से जो खून निकला था, उसे एक रूमाल से पोंछ कर रूमाल को खेत में ही दबा दिया।

फिर रौशनी को सहारा देकर उसके घर के पास छोड़ कर अपनी खाट पर आकर लेट गया।

तो दोस्तो, यह थी मेरी और रौशनी की चुदाई की कहानी,
आगे कभी आपको बताऊँगा कि भाभीजी की गाण्ड कैसे मारी और बाकी दो और चुतों की कहानी भी है। जिनको मैने इसी साल चोदा है।

दोस्तो, आपसे एक प्रार्थना है। कि प्लीज कोई भी मेल करके भाभीजी का पता या उनसे दोस्ती कराने को ना कहे, मै दोस्ती में किसी का भरोसा नहीं तोड़ता, भाभीजी भी मेरी दोस्त हैं, उनके साथ मै धोखा नहीं कर सकता हु।
यह कहानी कैसी थी, दोस्तो, जरूर बताना।

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