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बॉयोलॉजी छ्प गयी सेसोलोजि – hot lesbian sex story

Antarvasna hindi sex story, बॉयोलॉजी बन गयी सेसोलोजि, बहुत ही अछि और शामद सेक्स स्टोरी। ये कहानी एक लड़की की एयर एक ट्यूशन टीचर की है जो की वो भी एक लड़की ही है। आज एक बड़ी अजीब से ईमेल मुझे मिली, एक लड़की ने मेल भेज कर पूछा कि बायोलोजी की उसकी एक ट्यूशन टीचर ने उसके साथ लेसबियन सेक्स किया है और वो टीचर उस समलिंगी सेक्स की कहानी MyAntarvasna पर पढ़ना चाहती है, क्या उसकी कहानी भी MyAntarvasna पर छप सकती है?
मुझे क्या ऐतराज हो सकता tha. मैंने उसे डीटेल में अपनी कहानी लिख भेजने को कहा और जो मुझे प्राप्त हुआ उसमें थोड़ा बहुत फेर बदल करके आपके सामने पेश है.

मेरा नाम पूजा है, और मैं सोनीपत, हरि-याणा में रहती हूँ. अभी अभी मैंने अपनी पी एम टी का इम्तिहान क्लीयर किया है, आने वाले समय में मैं डॉक्टर बनूँगी.
मगर बात मेरे इम्तिहान क्लीयर करने की नहीं है, उसके पहले की है, जब मुझे 10+2 में पास होने के लिए ट्यूशन की ज़रूरत थी. बाकी सब सब्जेक्ट्स में मैं ठीक थी, मगर बायोलोजी से मुझे थोड़ा खतरा था, तो मैंने अपने मम्मी पापा से कहा कि मुझे बायोलोजी में ट्यूशन चाहिए.

हमारे घर से थोड़ी ही दूर पे एक बायोलोज़ी की मैडम रहती थी, जो ट्यूशन पढ़ाती थी.
मैं अपने पापा के साथ उनके पास गई और हमने बात की.
पापा ने कहा कि पूजा पर खास तवज्जो देकर इसे अच्छे से पढ़ाया जाए ताकि इसके अच्छे नंबर आयें!

मैडम ने मुझे शाम को साढ़े छह बजे से बुलाया.
अब मैडम के बारे में मैं आप सब को पहले से कुछ बता दूँ.

मैडम पुनीता जैन करीब 44-45 साल की थी, रंग साफ, लंबी चौड़ी, काफी सेहतमंद. घर में अकेली रहती थी, पति बाहर के शहर में जॉब करते थे, बेटा खुद बाहर पढ़ रहा था तो वो अपने घर में अकेली ही रहती थी.

पढ़ाई शुरू हो गई, मैडम मुझे बहुत दिल लगा कर प्यार से पढ़ा रही थी. उनके पढ़ाने का तरीका मुझे भी बहुत ठीक लगा. दिन बीतने लगे, मगर हर बीतने वाले दिन के साथ बहुत सी और बातें भी मेरे सामने आने लगी.
मैडम अपने ही घर में खुद ऊपर वाले पोर्शन में रहती थी और नीचे का सारा घर किराए पे दे रखा था.
जब भी मैं मैडम के घर पढ़ने के लिए जाती वो अक्सर मुझे देर तक पढ़ाती, शाम को करीब सात बजे चाय पीती, कभी खुद बनाती, कभी मुझसे भी बनवा लेती.

दिन ब दिन हम एक दूसरे के और करीब आती गई. मैडम अक्सर बहुत ही फैशनेबल कपड़े पहनती, कभी साड़ी, कभी सूट, कभी, जीन्स, कैप्री और निकर भी.

एक दिन जब मैं पढ़ने उनके घर गई, तो मैडम ने टी शर्ट के साथ शॉर्ट्स पहने थे, मैंने देखा तो कहा- वाह मैडम, आज तो बहुत गजब चीज लग रही हो!
मेरी तरफ देख कर मैडम हंस कर बोली- पहले यह बता… मैं गजब चीज कब नहीं लगती? मैं हूँ ही लाजवाब!
उनकी बात पर हम दोनों हंस पढ़ी.

ऐसे ही धीरे धीरे हम दोनों की नजदीकी बढ़ती गई. अक्सर मैडम मुझे यार कह कर बुलाती, मैं भी बात करते करते कभी कभी मैडम को यार कह देती, जब हम दोनों में करीब 20 साल से भी ज़्यादा का फर्क था.

हर रोज़ मैडम के नए नए रूप देखने को मिलते, जितना मैं मैडम के करीब आ रही थी उतना मुझे लग रहा था कि मुझे मैडम से प्यार सा होता जा रहा था, मैं चाहती थी कि मैं हमेशा मैडम के पास ही रहूँ.

एक दिन ट्यूशन में जब करीब 7 बजे मैडम चाय बनाने के लिए उठ कर गई, उस दिन मैडम ने कैमल कलर की शॉर्ट्स और टॉप पहना था, मैंने देखा शॉर्ट्स के बाहर जांघों से नीचे मैडम ने अपनी टांगों की हुत बढ़िया से वेक्सिंग की थी, एकदम गोरी और चिकनी मलाई सी टांगें.मैं अभी तक वैक्सिंग नहीं करती थी क्योंकि मेरी बाजू और टाँगों के बाल बहुत छोटे और बारीक थे, जो इतने दिखते नहीं थे.
मगर मैडम की बाजू और टांगें एकदम से साफ थी.

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जब मैडम चली जा रही थी, मैंने देखा कि मैडम की गोरी गुदाज़ भरवां टाँगों के ऊपर दो गोल विशाल हिप्स यानि कूल्हे भी थे, जो बहुत ही सेक्सी लग रहे थे.

मैडम ने रसोई में जाने के थोड़ी देर बाद मुझे आवाज़ लगाई.
मैं किचन में गई तो मैडम फर्श पर घुटनों के बल बैठी कुछ ढूंढ रही थी, अपने चारों पाँव पे वो एक घोड़ी की तरह खड़ी थी.

किचन में जाने पर सबसे पहले जिस चीज़ ने मेरा ध्यान खींचा वो थे मैडम के चूत…
बहुत ही सेक्सी पोज में थी जैन मैडम!
अब मैंने भी बहुत सारी अश्लील वीडियोज़ अपने मोबाइल में देख रखी थी, सो बेशक मैं भी लड़की थी, और वो भी औरत, मगर सेक्सी औरत हर एक के लिए सेक्सी ही होती है.

मुझे इस तरह उनके हिप्स को घूरते देख कर मैडम बोली- अरे मेरे हिप्स को देखना छोड़, बाद में देख लेना, पहले मुझे कुछ ला कर दे, ढक्कन शेल्फ के पीछे गिर गया है, उसे निकालना है.
मैं थोड़ा शर्मा सी गई, मगर भाग कर झाड़ू उठा लाई, ढक्कन निकाल कर मैडम ने ऊपर रखा और चाय बनाने लगी.
चाय बना कर हम दोनों वापिस अपने कमरे में आ गई.

चाय पीते पीते हम इधर उधर की बातें करने लगी.
तभी मैडम ने पूछा- सुन… बॉय फ्रेंड है तेरा कोई?
मैंने कहा- जी नहीं!
‘क्यों, इतनी सुंदर तो तू है, कोई मुश्टण्डे लाइन तो मारते ही होंगे?’ मैडम ने बहुत दोस्ताना सा होकर पूछा.
मैंने कहा- जी लाइन तो बहुत मारते हैं, पर डर लगता है, इसलिए किसी से दोस्ती नहीं की.

‘हम्म…’ कह मैडम चाय पीने लगी, फिर बोली- सुन जब मैं झुकी हुई थी, ढक्कन ढूंढ रही थी, तब तू क्या देख रही थी?
अब इस सवाल पे मैं असमंजस में पड़ गई कि मैडम को क्या जवाब दूँ? मैं चुप रही.
मैडम बोली- क्या मैं बहुत सेक्सी लग रही थी?
मैंने सर नीचे झुकाये हुये ही जवाब दिया- जी!

मैडम बोली- तुमने कभी सेक्स किया है?
मुझे बड़ी शर्म आई, मगर मैंने ना में सर हिला दिया.
‘कभी भी… कुछ भी?’ मैडम ने फिर पूछा.मैंने फिर न में सर हिलाया.
‘किसी से किस, या बूब दबाये हों?’ मैडम ने मेरे कंधे पे हाथ रख कर पूछा.
मैंने फिर सर ना में ही हिलाया.

‘मुझे तो सच में बहुत पसंद है सेक्स करना, सच में जब तुम्हारे अंकल आते हैं न, हम दोनों तो दो दो दिन तीन तीन दिन, कपड़े ही नहीं पहनते!’ कह कर वो हंसी.
तो मुझे भी हंसी आ गई, ‘तो क्या करते हो? मैंने पूछा.
‘अरे खुल कर सेक्स करते हैं, इस सोफ़े पर, इस चेयर पर, इस मेज़ पर, इस घर की हर जगह पर हमने सेक्स किया है.’ वो बहुत चहक कर खुश होकर बोली- जानती हो, तुम्हारे अंकल तो मुझे इतना प्यार करते हैं कि क्या बताऊँ, ना जाने कहाँ कहाँ से मेरे लिए नए नए कपड़े, अंडर गारमेंट्स और भी बहुत कुछ ला ला कर देते रहते हैं! देखोगी तुम?

कह कर मैडम ने बिना मेरा जवाब सुने मुझे बाजू से पकड़ा और साथ वाले कमरे में ले गई.
कमरे में अलमारी खोल कर मुझे अपने कपड़े दिखाने लगी. फिर नीचे वाली अलमारी खोली, उसमें तो… हे राम, इतनी किस्म किस्म की ब्रा और पेंटियाँ भरी पड़ी थी, हर रंग और डिजाइन की. मैडम ने मुझे सब निकाल निकाल कर दिखाई.

तभी मुझे अलमारी की साइड में पड़ा हुआ कुछ दिखा, मैंने पूछ लिया- वो क्या है?
मैडम ने एक मुस्कान दी और मुझे वो निकाल कर दिखाया.
वो एक काले रंग की रबर का बना हुआ डिल्डो यानि नकली लंड था.
मैडम ने उसे हाथ में पकड़ के हिलाते हुए कहा- अरे, ये तो मेरी जान है, जब तुम्हारे अंकल नहीं होते तो यही मेरे दर्द ए दिल की दवा है’.

मैंने पहली बार ऐसी कोई चीज़ देखी थी.
मैडम ने नीचे वाला दराज़ खोला तो उसके अंदर और 2-3 अलग अलग तरह के लंड पड़े थे.
मैंने पूछा- अरे इतने सारे, क्या करती हो इनका?
मैडम बोली- ये सब मेरे दिल की आग बुझाते हैं.

आगे की कहानी नेक्स्ट पेज पर….

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