loading...
railway-group-d

गोरलफ़्रेंड की सहेली

हिंदी कहानी दोस्तों उस समय मेरे क्लास में निशा के नाम की एक मस्त सी लड़की हुआ करती थी.. जो की उस समय मेरी गर्लफ्रेंड थी। उसी की प्रिय उर पक्की सहेली प्रभा ( जो कि बदला हुआ नाम है) थी। अब तक उसकी शादी हो चुकी थी। हम सभी लोग साथ में ही पढ़ते थे। प्रभा दिखने सुंदर थी.. उसकी उम्र 23-24 साल की थी, वो 30-28-32 के साइज की बहुत गोरी और सुदंर लड़की थी। उसकी चूचियाँ मस्त थीं। मैं निशा को कई बार चोद चुका हूँ..

तो प्रभा को भी चोदने मन करता था। यह सोच कर मेरा लंड तन कर खड़ा हो जाता था। एक दिन प्रभा का कॉल आया तो मैंने काल रिसीव किया। वो मुझसे नोट्स मांग रही थी.. तो मैंने कहा- नोट्स तो निशा के पास हैं। तो वह मुझसे बात करने लगी- मुझे तो नोट्स की सख्त जरूरत है। हम दोनों बातें करने लगे। मैंने उसके पति के बारे में पूछा.. तो वो बोली- आफिस के काम से बाहर गए हैं दो महीने के लिए। तो मैं बोला- अरे.. इतने दिनों के लिए? प्रभा बोली- हाँ.. मैं बोला- तो काम कैसे चलता है। हम तीनों चूंकि सेक्स के बारे में खुल कर बातें कर लेते थे.. तो प्रभा से बात करने में मुझे कोई झिझक नहीं होती थी। प्रभा ने कहा- कौन सा काम जी? मैं बोला- चुदाई.. तो बोली- क्या शशि.. तुम भी ना अजीब- अजीब बातें करते हो। ‘क्यों.. इसमें मैंने क्या अजीब पूछ लिया है?’ उसने हँस कर बोला- उसके लिए तुम हो ना.. मैं सकपका गया.. फिर मैंने मजाक करते हुए बोला- मैं क्यों? ‘हाँ.. तुम मेरी पूर्ति कर सकते हो..’ मैं राजी हो गया। मैंने बोला- कब मिलूँ? तो प्रभा बोली- परसों.. निशा कालेज नहीं आएगी.. तो हम दोनों का काम बन जाएगा। फिर प्रभा ने फोन काट दिया। मैंने निशा को फोन किया- तुम वो नोट्स प्रभा को दे देना और तुम परसों कालेज नहीं आओगी ना? तो निशा बोली- हाँ घर पर कुछ काम है इसलिए नहीं आ पाऊँगी। तो मैं मन ही मन खुश हुआ और फोन रख दिया। फिर मैं परसों के आने की प्रतीक्षा करने लगा। तीसरे दिन मैं कालेज गया.. वहाँ प्रभा आ गई। वो उस दिन साड़ी पहन कर आई थी। लंच टाइम के बाद हम लोग कालेज से बाहर आ गए और बाइक से एक लॉज की ओर चल दिए। रास्ते में प्रभा से मैंने पूछा- बीयर चलेगी? तो प्रभा बोली- हाँ.. हम दोनों बीयर और चिप्स लेकर लॉज में चल दिए। लॉज का मालिक मेरा दोस्त था.. तो एक सेफ कमरे की चाभी मिल गई। हम लोग कमरे में आ गए। प्रभा फ्रेश होने बाथरूम में गई, वो हाथ-मुँह धोकर आई.. तो मैंने उसको पीछे से पकड़ा और उसके दूध को दबाकर किस करने लगा.. तो प्रभा ने मुझे अलग कर दिया। फिर हम दोनों बिस्तर पर बैठकर बीयर के पैग बनाकर पीने लगे। बीयर पीने के बाद मैं उसके जिस्म को छूने लगा। धीरे-धीरे उसके दूध की तरफ हाथ ले जाकर दबाने लगा और उसको किस करने लगा। वो भी मुझे किस करने लगी। फिर मैंने एक हाथ से प्रभा की साड़ी को निकालना शुरू कर दिया और साड़ी ब्लाउज पेटीकोट को निकालकर फेंक दिया। अब वो केवल ब्रा और पैन्टी में थी। मैं उसके पीछे एक साइड में खड़ा होकर उसके गालों और पीठ को चुम्मी करने लगा। मैं लगातार उसकी पीठ पर हाथ फेर रहा था और जोर-जोर से दूध मसक रहा था। वो जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थी। मैंने एक उंगली को उसकी चूत में डाल दिया। उसकी चूत टाइट थी पर गीली होने की वजह से एकदम से उंगली चूत में घुस गई। अब मैंने भी अपना पैंट-शर्ट निकाल दिया और केवल अंडरवियर में आ गया। प्रभा ने मेरी अंडरवियर के अन्दर तन्नाया हुआ लंड देखा तो वो बोली- एक नंबर साइज का लम्बा और मोटा लंड है तेरा। मैंने कहा- ले ले.. देर किस बात की है। प्रभा ने हँसते हुए मेरे लंड को अंडरवियर से निकाल कर हिलाया और मुँह में लेकर चूसने लगी। मैं लौड़े के चूसने से मस्त हो उठा और उसके दूधों को लगातार दबाता रहा। साथ ही उसकी चूत में उंगली डाल कर हिला रहा था। वो भी मजे से सिसकारियाँ ले रही थी ‘आह..

हह.. आह..’ वो मेरे लंड को लगातार चूस रही थी.. तो मैं बोला- जान अब मेरा निकलने वाला है। प्रभा इशारे से बोली- पूरा माल मुँह में ही छोड़ दो। मैंने उसका इशारा मिलते ही अपने लंड का सारा माल उसके मुँह में भर दिया। मेरे पूरे वीर्य से उसका मुँह भर गया और मुँह से माल बहकर छाती में गिरने लगा। फिर प्रभा ने कपड़े से वीर्य को पोंछकर बिस्तर पर लेट गई। मैंने उसकी ब्रा और पैन्टी को निकाल कर फेंक दिया और भी अपना अंडरवियर निकाल दिया। उसको बिस्तर पर चित्त लिटा कर मैं उसकी चूत को चाटने लगा। क्या माल थी.. एक नंबर की कसी चूत जिसमें मीठा रस भरा था। चूत चूसने के साथ ही अपने एक हाथ से उसके दोनों दूधों को मसल रहा था। फिर मैं उसके दूध को चूसने लगा.. उसके ठोस मम्मों को पीने में भी मजा आ रहा था। प्रभा बोली- अब रहा नहीं जाता.. चोद डालो मुझे.. फाड़ दो मेरी चूत.. मैं 15 दिन से प्यासी हूँ.. बना दो मेरी बुर का भोसड़ा.. आज मुझे रंडी बना दो। फिर मैंने देर न करते हुऐ लंड का सुपारा उसकी चूत में टिका कर जगह बनाई और थोड़ा जोर से धक्का लगा दिया। प्रभा की चूत में मेरा लंड आधा घुस गया, प्रभा के मुँह से जोरदार चीख निकल गई ‘आह.. आह मर गई.. उई माँ फाड़ दी मेरी बुर को..’ यह कह कर वो चिल्लाने लगी। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर जमा दिए ताकि उसके मुँह से आवाज कम निकले। कुछ क्षण रुकने के बाद मैंने फिर जोर से धक्का लगा दिया। इस बार मेरा पूरा लंड उसकी बुर में जड़ तक समा गया और उसके बच्चेदानी से टकरा गया। वो जोर-जोर से चिल्ला रही थी..

loading...

और मेरा धक्का लगाना जारी था। धीरे-धीरे उसको मजा आने लगा। अब मैं कमर हिला-हिला कर चोद रहा था और वो नीचे से उचक-उचक कर मेरे लौड़े को मजा दे रही थी। उसकी चूत से रस निकल गया था जिससे ‘फच.. फच..’

की आवाजें आ रही थी। मैं प्रभा से बोला- मजा आ रहा है? प्रभा बोली- आह्ह.. साले तुम एक नंबर की चुदाई करते हो यार शशि.. चोदो। मैं बोला- तेरा पति ठीक से नहीं चोदता है क्या? तो प्रभा बोली- वो चोदते तो हैं.. पर कई दिन तो शराब के नशे में आते हैं.. दो-चार धक्के लगाकर माल गिराकर सो जाते हैं और मैं तड़प कर रह जाती हूँ। मेरे चुदने का शौक पूरा नहीं हो पाता है। मैंने जोर-जोर से धक्के लगाना जारी रखा। प्रभा बोली- आह्ह.. मैं झड़ने वाली हूँ। मैं भी बोला- आह्ह.. मेरा भी निकलने वाला है रानी.. किधर लेगी। प्रभा बोली- सारा माल मेरी चूत में ही छोड़ दो। मैंने उसकी चूत में पूरा वीर्य छोड़ दिया। चूत वीर्य से लबालब भर गईई। मेरे साथ वो भी झड़ गई थी। फिर कुछ देर बाद प्रभा मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। इसके बाद हम दोनों कुछ देर के लिए एक साथ लेट गए। फिर प्रभा बाथरूम में जाकर चूत को धोने लगी.. तो मैं भी पीछे से बाथरूम में जाकर प्रभा के पीछे से दूध को दबाने लगा। वो चूत में साबुन लगा कर उसे धो रही थी। मैंने भी अपना लंड धोकर प्रभा के मुँह में डाल दिया और प्रभा लॉलीपॉप की तरह लौड़ा चूसने लगी। वहीं पर मैं दुबारा उसके मुँह में झड़ गया, वो सारा माल पी गई। फिर हम दोनों बिस्तर पर आ गए और मैं प्रभा की चिकनी चूत को चाटने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी.. अब मैंने उसे गांड मारने की कह कर पटा लिया और पीछे से उसकी गांड में थूक लगाकर लंड को गांड के छेद में टिकाकर धक्का लगाया। वो जोर से चिल्लाई..

मैंने उसकी चिल्लाहट को अनसुना करते हुए करारे शॉट मारकर लौड़ा झाड़ कर बाहर निकाल लिया। फिर कुछ देर एक साथ लेटे रहे.. उसके बाद हम दोनों अपने-अपने कपड़े पहनने लगे। मैं कपड़े पहनते समय उसके दूध को दबाता और किस करता रहा कभी चूत पर हाथ फिरा देता.. तो कभी पीठ में हाथ फेर देता था। फिर हम दोनों ने एक-दूसरे को बाँहों में भरकर लंबी चुम्मी ली और लॉज के बाहर आ गए। फिर बाहर एक होटल में खाना खाकर हम दोनों अपने-अपने घर चल दिए। दोस्तो, कैसी लगी मेरी कालेज गर्लफ्रेंड की सहेली प्रभा की चुदाई की सच्ची कहानी..

अन्य मजेदार कहानियाँ

loading...