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चाची की बड़ी गांड में

Sex story in hindi, लचाची की बड़ी गांड में छोटा सा लन्ड। तो मेरे मित्रों गन। मेरा नाम है झकास आसू श्रीवास्तव और दोस्तों मैं जयपुर का ही रहने वाला हूँ. मेरी उम्र अभी 24 साल है. 24 साल की इस जवानी में मैंने कई लोगो को संतुष्ट किया है. मेरे को पहले कुछ नहीं पता था. लेकिन कॉलेज में आने के बाद मेरा भी लंड कुछ चाहने लग गया. वो था लड़कियों की चूत! उनका उभरा हुआ बूब्स और उनकी मटकती फुदकती गांड! मेरे को ये सब कॉलेज में नए नए दोस्तों ने ब्लू फिल्म दिखाकर कराया था.

मेरे अंदर का शैतान दोस्तों ने जगा दिया. मै भी लड़कियों में इंटरेस्ट लेने लगा. मेरी स्मार्टनेस की वजह से लड़कियों को पटाने में ज्यादा टाइम नहीं लगता था. एक नजर में लड़कियों को पटा लेता था. लड़कियों के साथ साथ हर किसी लेडीज को देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था, मै अपने चाचा के यहां गया हुआ था.

वहाँ पर चाची को ही देखकर मेरा लंड खड़ा ही गया. मेरे को चाची को ही चोद डालने को मन कर रहा था. वो मेरी सबसे बड़ी चाची थी. उनका नाम आराधना था. देखने में वो बहुत ही गजब की माल दिखती थीं. उनकी उम्र तो ज्यादा थीं. मेरे उम्र का उनका लड़का था. लेकिन कोई देखकर उन्हें नहीं बता सकता था. उनका 36-32-34 का बदन आज भी बहुत कसा हुआ था.

उनके अंदर जवानी का रस आज भी भरा हुआ था. चाचा ज्यादातर बाहर ही रहते थे. वो कभी कभी ही आते थे. चाचा के यहां पहुचते ही चाची को देखकर मेरा लंड खड़ा होकर कडा हो गया. चाची की गोल गोल गांड को देखकर मैं पागल होता जा रहा था.

उनके 36 के चूचे को देखकर पीने को मन कर रहा था. चाचा काफी दिनों से घर नहीं आये हुए थे. चाची उन्ही के बारे में बात कर रही थी. मेरे चाचा का एक ही लड़का है. जों की दिल्ली में आई ए एस की तैयारी कर रहा था. वो भी कभी कभी ही घर आता था. नानी भी अब नहीं थी. हाल ही में उनका भी देहांत हो गया था. चाची घर पर अकेली ही रहती थी. जब मैं जाता था तो वो कुछ दिन के लिए रोक लिया करती थी.

चाची ने उस दिन भी मेरे को रोका. मै भी एक लड़की के चक्कर में रुका गया. चाचा के घर के बगल में एक लड़की आई हुई थी. उसी के साथ एक बार किसी तरह से सम्भोग करने के चक्कर में रुका हुआ था. लेकिन वो दूसरे दिन ही चली गयी. मै भी चाची से अपने घर जाने के लिए कहने लगा. चाची ने मेरे को जबरदस्ती रोक रखा था. लेकिन मेरे को क्या पता था कि चाची मेरे इन्तजार का इतना मीठा फल देंगी. दिन में वो लेटी हुई थी.

मै सोती हुई चाची को ही ताड़ राहज था. मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था. मैंने चाची के ब्लाउज के ऊपर से ही उनके दूध को हल्के हाथों से दबाया. बहुत ही सॉफ्ट दूध लग रहे थे. शाम को वो उठी तो उनकी कमर में दर्द होने लगा.

चाची: आसू मेरी कमर बहुत तेज दर्द कर रही है.

मै: चाची मूव लगा ली दर्द जल्दी ठीक हो जाएगा.

चाची: ज़रा मेरे को ढूंढ के दे दो

मै: ठीक है चाची अभी ढूंढ के देता हूँ.

बहुत ढूंढने के बाद नहीं मिला तो चाची ने दर्द निवारक एक उपाय बताया.

चाची: कोई बात नही! नहीं मिला है तो तुम जाकर थोड़ा सा तेल गर्म करके ले आओ.

मैंने वैसा ही किया. तेल गर्म करके चाची को दे दिया. चाची अपनी चिकनी कमर पर तेल लगाकर मालिश करने लगी. मै बैठा हुआ देख रहा था. वो अपने हाथों से तेल अच्छे से नहीं लगा पा रही थी.

मै: चाची लाओ मै लगा देता हूँ आप अच्छे से नहीं लगा पा रही हो.

चाची: तुम कितने स्वीट हो! चल जल्दी से मालिश कर दे मेरी जान!

चाची की कमर पर मैं दबा दबा कर के मालिश करने लगा. मेरे को डर भी लग रहा था कि कहीं मेरा हाथ इधर उधर हो गया तो बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो जायेगी. मेरे को क्या पता था चाची का भी मौसम बना हुआ था. मेरे आकर्षक शरीर की तारीफ़ करते हुए मालिश करवा रही थी.

चाची: तेरे हाथो में तो जादू है जहाँ जहाँ लगता है सब दर्द ख़त्म हो जाता है.

चाची मेरे को हाथ को गांड की तरफ बढ़वा रही थी. वो जिस जगह बताती मै मालिश करने लगता. ऊपर नीचे दाए बाए करके वो मेरे हाथ को अपनी गांड पर रखा ली.

मेरे को शर्म आ रही है. उस समय मै मेडिकल की तैयारी कर रहा था. मेरे को शर्माता देख चाची ने मेरे को समझाया.

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चाची: मान लो तुम डॉक्टर हो गए और किसी के गुप्तांग में कोई प्रॉब्लम हो तो तुम ऐसे ही शर्म करोगे तो कैसे चलेगा!

मै अपना शर्मीला चेहरा छुपाकर चाची की तरफ देख कर एक हल्की सी स्माइल दी. चाची के बताए हुए गांड के बीचों बीच अपना हाथ घुमाकर मजे लेने लगा. चाची ने उस दिन साडी ब्लाउज के साथ साथ पेटीकोट भी पहना हुआ था. चाची की पैंटी भी मेरे हाथों में लग रही थी. चाची ने अपनी पेटीकोट का नाडा खोलकर ढीला किया. मै अब आसानी से सब कुछ कर पा रहा था. चाची ने मेरे को भी सब कुछ करवाकर उत्तेजित करवा दिया. अचानक से चाची पलट गयी. मेरा हाथ उनकी गांड से हटकर चूत पर रख गयी. उनकी चूत काफी फूली हुई लग रही थी. मैने अपना हाथ हटाना चाहा उससे पहले चाची ने मेरे हाथ को पकड़ लिया. वो मेरे को उसे मसलने को कहने लगी.

चाची: आसू बेटा मसल दे आज इसे भी!

मै: चाची आपकी तो कमर में दर्द था. फिर आप मेरे से अपनी चूत को क्यों मसलवा रही हो.

चाची: मेरी चूत के भीतर भी दर्द हो रहा है.

मै: उसके अंदर का दर्द कैसे कम करूं?

चाची: मेरी चूत के भीतर का भी निवारण है तेरे पास!

मै: वो कैसे??

चाची: अपना औजार डालकर मेरे को चोदो फिर सारा दर्द ख़त्म हो जायेगा.

मेरे को शर्म आ गयी. मै बहुत ही आश्चर्य में पड़ गया. चाची की चूत में हाथ घुसेड़ा जा रहा था और न ही हटाने की मन कर रहा था. चाची ने अपने हाथ को मेरे हाथ पर रखकर चूत पर मसलना शुरू किया. चाची गर्म होकर मेरे से चिपक गई.

चाची: आसू बेटा आज मेरे साथ सम्भोग कर! मेरे को चोद डाल! ज़रा मै भी देखू तुझमे कितना दम है

चाची ने मेरी मर्दानिगी को ललकारा! मैंने चाची को पकड़ कर उनके गले पर किस कर लिया. वो मुझे जोर से दबाने लगीं. उनके गोरे गोरे गले पर निकला काला तिल बहुत ही अच्छा लग रहा था. वो भी गर्म होने लगी. सब कुछ आज बहुत ही अजीब लग रहा था. मैंने चाची का चेहरा आँखों के सामने करके. कुछ देर तक देखा. उसके बाद उनके गुलाब जैसे होंठो पर अपना होंठ चिपका कर खूब चुसाई किया. नरम नरम होंठो के रस को चूसने में बहुत ही मजा आ रहा था. उसके होंठो का रस बहुत ही जबरदस्त लग रही थी. चाची की होठो में इतनी मिठास होगी मैंने सपने में भी नहीं सोचा था.

धीरे धीरे मै उनके होंठो से अपने होंठ नीचे करके चुम्बन प्रक्रिया जारी रखा. वो गर्म हो रहीं थी. चाची की चूंचिया साफ़ साफ़ दिख रही थी. मैंने उनके बूब्स को ऊपर से किस करके दबाया. उसके बाद ब्लाउज का एक एक बटन खोलकर निकाल दिया. उनके दोनों बूब्स मुझे ब्रा में दिखने लगे. उनको अच्छे से देखने की बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी. मैंने उनको बैठा कर पीछे से हुक खोलकर निकाल दिया. दोनों मुसम्मी को हाथो में लेकर खेलने लगा. उनकी साँसे तेज हो रही थी. मेरा लंड चैन फाड़ कर बाहर आने को बेचैन हो रहा था. दोनो निप्पलों पर अपना मुह लगाकर बारी बारी से दोनों का मजा ले कर पीने लगा.

उनकी तेज साँसों के साथ सिसकारी भी निकल रही थी. वो जोर जोर से “……अई …अई ….अई ……अई ….इसस्स्स्स्स् …….उहह्ह्ह्ह …..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिसकारी भर रही थी. मैंने मुसम्मी का रस खूब अच्छे से पीकर उनकी साडी निकालने लगा. चाची ने पहले से ही पेटीकोट के नाड़े को खोल रखा था. अब चाची की चूत के दर्शन के लिए उनकी पेटिकोट को उतारना था. चाची खड़ी हो गयी. उनका पेटिकोट आटोमेटिक नीचे गिर गया. पैंटी को उतारते हुए मैंने चाची की चूत की एक झलक देखी. चाची की चूत बहुत ही रसभरी लग रही थी. दोनों किनारा चूत का बहुत ही फूला हुआ लग रहा था. इतना छरहरा बदन आज मैं पहली बार छू रहा था. मैंने अपना मुह उनकी चूत पर लगाकर उनकी चूत को चाटने लगा. मैने चाची की चूत की एक एक पंखुडी को पकड़कर खूब चूसा. कुछ देर तक मैंने उनके चूत के दाने को काट काट कर उसका भरपूर आनंद लिया. वो गर्म होकर चादर को हाथो से पकड़ कर “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ…. अअअअअ …. आहा …हा हा हा” की जोर जोर से सिसकारी ले कर साँसे छोड़ रही थी. मैंने चूत पीना बंद करके अपना लंड पैंट खोलकर निकाला. मेरा 7 इंच का लंड देखकर वो चौक गई.

चाची: बाप रे इतना बड़ा लंड है तेरा. ये तो मेरी चूत को फाड़कर उसका भरता बना डालेगा.

उसके बाद उन्होंने मेरे लंड को सहला कर चूसना शुरू किया. चाची ने खूब ढेर सारा तेल लगाकर मेरे लंड की मालिश करके उसे टाइट कर दिया. लगभग 10 मिनट तक उन्होंने मेरे लंड का मसाज किया. मैंने उनको बिस्तर पर लिटा दिया. दोनों टांगो को खोलकर उनकी चूत में अपना लंड डालने लगा. बहुत दिनों बाद चुदाई करवाने से उनकी चूत टाइट हो चुकी थी. आम लड़कियों की चूत से ढीली थी चाची की चूत! पहले भी चुदी होने के कारण मेरे को लंड घुसाने में कोई प्रॉब्लम नहीं हुई. लंड के चूत में प्रवेश करते ही वो जोर “ओह्ह माँ ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ ……अ अ अ अ अ आ आ आ आ ….” चिल्लाने लगी.

उनकी चूत फट गई. तेल की चिकनाई की वजह से मेरा पूरा लंड उनकी चूत में एक ही बार में घुस गया. मै पूरा लंड अंदर बाहर करके चोदने लगा. मुझे तो टाइट चूत चोदने में बहुत मजा आता था. धीरे धीरे उनकी चिल्लाने की आवाज धीमी होने लगी. मेरा लंड घच्च घच उनकी चूत में कूद कर चुदाई कर रहा था. मैंने उन्हें उठाया. उनकी एक टांग को उठाकर अपने कंधे पर रख कर चूत में लंड डालकर चुदाई करने लगा. खड़े खड़े उनकी चुदाई का कार्यक्रम जारी रखा. जड़ तक लंड डाल डाल कर खूब मजे से चुदाई कर रहा था. उनके होंठो को चूस चूस कर उनकी चुदाई कर रहा था. इस बार की चुदाई से वो चिल्लाने लगी. वो जोर से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज निकाल कर मेरा साथ देकर चुदवाने में मस्त थी.

मेरा गला पकड़ कर उछल उछल कर चुदवा रही थी. लगातार चुदाई करते करते चाची की चूत ने अपना माल निकाल दिया. चाची के माल की चिकनाई से मेरा लंड और तेजी से अंदर बाहर होकर चुदाई कर रहा था. उनकी चूत ढीली हो चुकी थी. अब मजा नहीं आ रहा था. मैंने उनको नीचे उतारा. उनको झुकाकर गांड में लंड डालने लगा. मेरा आधा लंड ही अंदर घुसा था कि वो जोर से “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ …. ऊँ —ऊँ …ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की चीख निकालने लगी. मैंने बार बार कोशिश करके पूरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया. पूरा लंड खाकर वो जोर जोर से चिल्ला रही थी. उनकी गांड चोदने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था. चाची की मोटी गांड काफी टाइट थी. वो गांड हिला हिला कर चुदवाने लगी. धका पेल लंड पेलते पेलते उनकी चूंचियां हिल रही थी. उनको भी बहुत मजा आ रहा था. पूरा बिस्तर हिल हिल कर आवाज कर रहा था. वो गांड आगे पीछे करके “…. उंह उंह उंह हूँ .. हूँ … हूँ .. हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज के साथ चुदवाने लगी. मै भी झड़ने की स्थिति में आने लगा. मेरा माल छूटने वाला था.

मै: चाची मै झड़ने वाला हूँ.

चाची: आसू मेरी जान मेरे मुह में डाल दे अपना माल!

मैने वैसा ही किया. उनकी गांड से अपना लंड निकाल कर अपना पूरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया. मेरे लंड को खाकर चाची बहुत खुश थी. कुछ दिन रूककर चाची को खूब चोदा.

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