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जन्मदिन पर एक मस्त गिफ्ट मिला 

antarvasna hindi story, chudai ki kahani हैल्लो दोस्तों, में मनीषा एक बार फिर से आप सभी के सामने कामुकता डॉट कॉम पर अपनी दूसरी कहानी लेकर आई हूँ और में उम्मीद करती हूँ कि आप सभी ने मेरी पिछली कहानी जरुर पढ़ी होगी, जिसमें मैंने बहुत जमकर चुदाई के मज़े लिए और मुझे अब तक सेक्स की बहुत आदत हो गई है और अब मेरा मुंबई से लौटने के बाद मन नहीं भर रहा। खैर में आपका ज़्यादा टाईम ना लेते हुए अपनी स्टोरी पर आती हूँ। दोस्तों जैसा कि मैंने आप सभी लोगों को अपनी पिछली कहानी में धीरज के बारे में बताया था और मेरी उससे बहुत अच्छी दोस्ती हो गई और में उसके साथ घूमने फिरने भी लगी थी। मेरा जन्मदिन 14 जून को होता है तो उसने मुझसे उस दिन अपने साथ मिलकर जन्मदिन मनाने को कहा तो में तैयार हो गई, क्योंकि उस समय मेरे घर वाले दुबई गये थे, इसलिए मुझे कोई समस्या भी नहीं थी। 13 को उसने मुझे बताया कि उसका कोई बहुत अच्छा दोस्त है, वो 14 को दिल्ली से आ रहा है तो इसलिए शायद वो कल शाम को मेरे साथ नहीं रह पाएगा, क्योंकि उसे अपने उस दोस्त से मिलने जाना होगा

फिर मैंने उससे कहा कि कोई बात नहीं है, में भी तुम्हारे साथ उससे मिलने चल चलूंगी और फिर हम दोनों वहाँ से लौटकर रात का खाना खा लेंगे और 14 को में अपने घर से तैयार होकर 11:30 पर निकली और हम सहारा गूँज में मिले। मैंने उससे उसकी गाड़ी को वहीं पर खड़ा करके मेरे साथ कार से चलने के लिए कहा, लेकिन उसने मुझसे कहा कि तुम कार को खड़ा कर दो, हम दोनों बाईक से चलते है। फिर मैंने अपनी कार को वहीं पर खड़ा कर दिया और अब में उसके साथ लम्बी ड्राइव पर निकल गई और हम लोग पिकनिक पर पहुंचे, वहाँ पर हम बहुत दूर तक घूमते रहे। उसके बाद हम बोटिंग के लिए गये और ठंड की वजह से झील में 2-3 बोट ही थी और जब हमारी बोट के आस पास कोई बोट नहीं थी, तब उसने पेड्ल मारने बंद कर दिए और वो मुझे किस करने लगा, तो मैंने उससे कहा कि पागल हो क्या कोई हमें देख लेगा? तो वो कहने लगा कि हमारे जैसे पागल ही इस ठंड में बोटिंग कर रहे होंगे, इसलिए हमे यहाँ पर कोई नहीं देखेगा और फिर वो मुझे किस करते हुए मेरे बूब्स को भी दबाने लगा और थोड़ी देर तक में उससे कुछ नहीं बोली, जिसकी वजह से उसकी हिम्मत ज्यादा बढ़ती चली गई, लेकिन जब उसका हाथ नीचे जाने लगा तो मैंने उससे कहा कि अब यहाँ से चलो।

अब वहाँ से निकलकर हमने कुछ फास्ट फूड लिया और उसके बाद हमने फिल्म देखने का विचार बनाया, इसलिए हम पास के सिनेमा में फिल्म देखने पहुंचे। फिर मैंने देखा कि वहां पर कुछ ख़ास भीड़ नहीं है, हम दोनों आखरी की सीट पर बैठ गये। फिर थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा कि क्यों ना में आज़ रात को उसके साथ ही रुक जाऊं? तो मैंने उससे पूछा, लेकिन हम रूकेंगे कहाँ? तो उसने मुझसे कहा कि हम किसी होटल में रूकते है। मैंने उससे कहा कि नहीं कोई हमे वहां पर देख लेगा तो बहुत बड़ी मुश्किल हो जाएगी, लेकिन फिर भी मैंने बाहर निकलकर अपने घर पर फोन करके बता दिया कि में आज रात को अपनी सहेली शालिनी के रूम पर ही रुक जाऊंगी, लेकिन मैंने धीरज को इस बारे में कुछ नहीं बताया। फिर हम दोनों फिल्म देखने लगे और थोड़ी देर बाद मुझे उसका हाथ मेरे पैर पर महसूस हुआ तो वो मेरी जाँघ को सहला रहा था और जब मैंने उसे मना नहीं किया तो उसका एक हाथ मेरे बूब्स पर आ गया और वो मेरे कपड़ों के ऊपर से ही मेरी निप्पल को दबाने लगा। मैंने उसे ऐसा करने के लिए मना किया, उससे कहा कि प्लीज ऐसा मत करो, लेकिन जब उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया तो मैंने धीरे से उसकी पेंट की चैन को खोलकर उसका लंड अपने हाथ से सहलाने लगी और अब हम दोनों के बदन में वो आग लग चुकी थी और हमें रूम का समझ नहीं आ रहा था कि कहाँ मिलेगा, जब फिल्म ख़तम हुई तो मुझे अपने अंदर कुछ गीला गीला सा लग रहा था। हम बाहर निकलने वाले ही थे कि उसके दोस्त का फोन आ गया कि वो होटल में उसका इंतज़ार कर रहा है। फिर मैंने अपनी कार बाहर निकाली और उससे कहा कि में तुम्हें होटल तक छोड़ देती हूँ। तब उसने मुझसे कहा कि हाँ तुम भी चलो हम थोड़ी देर रुककर वापस आ जाएँगे। फिर मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक है और हम दोनों होटल पहुंचे। उसके बाद उसने मुझे वहां पर अपने दोस्त से मिलवाया, उसका नाम समीर था। फिर उसके दोस्त ने उससे पूछा कि में कौन हूँ? तब उसने अपने दोस्त से कहा कि में उसकी दोस्त हूँ, तब समीर ने पूछा क्या यह वही है? तो धीरज का जवाब हाँ में था, लेकिन पहले मैंने इस बात पर इतना ध्यान नहीं दिया और अभी 7 भी नहीं बज़े थे कि जब धीरज ने उसे बताया कि आज़ मेरा जन्मदिन है। फिर उसने मुझसे पार्टी के लिए कहा तो मैंने कहा जैसी पार्टी चाहिए ले लो और फिर हम सब होटल से बाहर निकल आए तो वहाँ से वो लोग एक बेकरी पर गये और एक केक लिया। उसके बाद एक कपड़ो की दुकान पर से पसंद करके मेरे लिए एक ड्रेस खरीदी, तब धीरज ने मुझसे मेरे फिगर का आकार पूछा तो मैंने धीरे से उसको बता दिया।

अब वो दुकान से बाहर निकल आया और वो मुझसे कहकर गया कि तुम कपड़े पेक करवाओ, में दस मिनट में आता हूँ और हम दोनों वो कपड़े पेक करवाकर कार में बैठ गये। तभी थोड़ी देर में धीरज लौट आया और हम जब होटल लौटकर आए, तब समीर ने खाने का ऑडर किया और तब धीरज ने मुझसे पूछा कि क्या में ड्रिंक करना पसंद करूँगी? तो मैंने कहा कि नहीं मुझे घर जाना है तो उसने मुझसे कहा कि वैसे घर पर तुम्हारे पापा मम्मी नहीं है। फिर तुम थोड़ी तो पी सकती हो। अब मैंने उसकी बात सुनकर उससे कहा कि हाँ ठीक है, में थोड़ी पी लूँगी। समीर ने बोतल निकाली और स्नॅक्स का ऑडर कर दिया। तब धीरज ने कहा कि पीने से पहले केक तो काट लो। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है, तब समीर ने मुझे मेरा ड्रेस गिफ्ट किया और उसने मुझसे कहा कि तुम इसे पहन लो। उसके बाद में केक काटना तभी एक छोटा सा पेकेट धीरज ने भी मुझे दे दिया और कहा कि यह मेरा गिफ्ट है, मैंने उससे पूछा इसमे क्या है? तो वो मुस्कुराते हुए मुझसे कहने लगा कि बाथरूम में जाकर देख लेना और में बाथरूम में कपड़े बदलने चली गई। जब मैंने धीरज का गिफ्ट खोलकर देखा तो उसमे ब्रा और पेंटी थी, में उसको देखकर शरमाकर सोचने लगी कि धीरज ने शायद इसलिए मेरा फिगर पूछा था।

अब मैंने एक हल्का सा बाथ लिया और में कपड़े बदलने लगी। जब मैंने ब्रा पहनी तो उस पर लिखा था, मुझे ज़ोर से दबाओ और जब पेंटी पहनी तो उस पर लिखा था चोदो मुझे ज़ोर से। उसके बाद मैंने समीर का दिया हुआ स्कर्ट पहना वो लंबी स्कर्ट थी, जिसमें साईड कट था, जब मैंने टॉप पहना तो वो बहुत छोटा था, उसमे से मेरी नाभि साफ साफ दिखाई दे रही थी। फिर मैंने जब धीरज से पूछा कि तुम्हारे पास कोई परफ्यूम है क्या? तो उसने कहा नहीं, में तैयार होकर बाहर निकल आई, जब में बाहर निकली तो दोनों मुझे अपनी फटी फटी आँखों से देख रहे थे। अब उन्होंने केक को टेबल पर सजा दिया और मुझसे काटने के लिए कहा। मैंने जैसे ही केक को काटा और धीरज को खिलाया तो उसने केक सहित मेरा हाथ वहीं पर रोक लिया और कहा कि आज ऐसे ही किस करते है, आधा केक उसके मुहं के बाहर था। मैंने आगे बढ़कर उसे अपने मुहं में ले लिया ही था तो उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया, जैसे तैसे मैंने खुद को उससे छुड़वाया। फिर मैंने केक समीर को खिलाया, समीर ने मुझे हग किया और मेरे गाल पर एक किस ले लिया। फिर उन्होंने ड्रिंक बनाई, मुझे उस समय मुंबई की याद आ गई।

फिर मैंने उससे कहा कि जो कुछ खाना पीना है ज़ल्दी कर लो, मुझे उसके बाद अपने घर भी जाना है। तब धीरज बोला कि तुम आज यहीं पर रुक जाओ। मैंने उससे पूछा क्या मतलब? तो उसने कहा कि कुछ नहीं। फिर हमने ड्रिंक की, में कहती तो यही थी कि यह मुझे यहीं पर रोक लें 3-3 पेग होने के बाद समीर ने पूछा, धीरज ने क्या गिफ्ट दिया है? यह तो बताओ। फिर मैंने उससे कहा कि में तुम्हें नहीं बता सकती। तब धीरज ने मुझसे कहा कि दिखा भी दो। फिर मैंने उससे कहा कि नहीं में खाना खाकर घर पर जाऊंगी, तो वो कहने लगा कि हाँ ठीक है, तुम खाना खाकर चली जाना और इतनी देर में खाना आ गया और हम सबने एक साथ बैठकर खाना खाया। उसके बाद मैंने उनसे कहा कि में अब जा रही हूँ। तब समीर ने मुझसे कहा कि वो गिफ्ट तो दिखा दो। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है, लेकिन अगर धीरज कहे तो वो दिखा सकता है, धीरज मेरे पास आया और उसने मेरी टॉप को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया और थोड़ा सा मेरी स्कर्ट को भी नीचे किया। फिर समीर ने कहा कि ऐसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है, तुम एक बार उतारकर दिखा दो और धीरज ने तुरंत एक झटके के साथ मेरे टॉप को पूरा नीचे उतार दिया। फिर मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी ब्रा को छुपा लिया और फिर जब समीर ने मेरी स्कर्ट को नीचे किया तो मेरा एक हाथ ब्रा पर और एक मेरी पेंटी पर था।

तब समीर मुझसे बोला कि मुझे बहुत अच्छी तरह से पता है कि तुम 31 की रात तीन लोगों से अपनी चुदाई करवा चुकी हो, तो में उसके मुहं से यह बात सुनकर एकदम चकित रह गई। तभी मैंने धीरज से पूछा कि यह क्या है? तब उसने कहा कि कुछ नहीं। मैंने इसे सब पहले ही बता दिया था और मेरी तुम्हारी दोस्ती बाद में हुई थी। फिर मैंने उससे पूछा कि अब बताओ क्या करना है? तब धीरज मुझसे बोला कि इसे तुम मेरा गिफ्ट दिखाकर चली जाओ। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है और अब में अपनी स्कर्ट और टॉप को नीचे उतारकर उनके सामने खड़ी हो गई। अब समीर तुरंत मेरे पास आकर मेरे बूब्स पर झपट पड़ा और बूब्स को दबाने लगा। मैंने उससे पूछा कि यह क्या हो रहा है? तो उसने कहा कि इस पर लिखा है मुझे ज़ोर से दबाओ। तभी धीरज बोला कि नीचे भी तो देखो। तब समीर मुझसे बोला कि तुम आज़ रात को यहीं पर रुक जाओ। अब मैंने उससे पूछा ऐसा क्यों, तब वो बोला कि नीचे लिखा है मुझे ज़ोर से चोदो, तो आज़ में इसलिए तुम्हें जमकर चोदना चाहता हूँ। दोस्तों में चाहती भी यही थी, तो मैंने मन ही मन बहुत खुश होकर नाटक करते हुए उससे कहा कि में नहीं रुक सकती। तभी उसने कहा कि शायद जहाँ तक मेरी सोच जाती है, तुम भी इस ब्रा और पेंटी में तो तुम बाहर नहीं जा सकती। ।

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अब में कुछ सोच नहीं पा रही थी कि में क्या करूं? तब तक समीर ने मुझे किस करना शुरू कर दिया। फिर मैंने सोचा कि रुक जाती हूँ और फिर में उसका साथ देने लगी। फिर वो ज़ोर से मेरे बूब्स को दबा रहा था, लेकिन में मज़े कर रही थी, वो बहुत ज़्यादा ही ज़ोर से मेरे बूब्स को दबा रहा था, जिस कारण मुझे दर्द भी हो रहा था, लेकिन में कुछ नहीं बोली। फिर समीर ने मुझसे पूछा कि एक बात बताओ क्या तुम मुझे झेल सकती हो? मैंने पूछा क्यों? तो उसने कहा कि यह तो पता चल जाएगा। फिर उसने मुझसे पूछा कि कैसे चुदना पसंद करोगी? तो मैंने उससे कहा कि जैसे तुम्हें मज़ा आए। तब उसने कहा कि हाँ ठीक है, में समय आने पर तुम्हें बता दूँगा और वो दोबारा मेरे बूब्स को दबाता रहा। फिर जैसे ही उसने मेरी ब्रा को उतारकर मेरे निप्पल को छुआ तो में एकदम सिहर उठी, उसे पता था कि लड़की की कमज़ोरी उसके निप्पल है, वो अब मेरे निपल्स को पकड़ लिया, में आह्ह्हह्ह्ह अईईईईई करते हुए उससे चिपक गई। तभी वो मुझसे पूछने लगा कि क्या तुम मुझे एक बात सच सच बता सकती हो? तो मैंने उससे पूछा क्या? तब उसने मुझसे पूछा कि अब तक में कितनो के साथ सेक्स कर चुकी हो? दोस्तों में सच तो बोल नहीं सकती थी, लेकिन फिर भी मैंने उससे कहा कि पहले अपने बॉयफ्रेंड के साथ उसके बाद 31 की रात को क्या हुआ, यह तो आपको पहले से ही पता है और अब उसने मुझे बताया कि वो बिना कंडोम के मेरे साथ सेक्स करना चाहता है। मैंने उससे साफ मना किया, लेकिन उसने कहा कि कोई दिक्कत नहीं होगी और में उससे कुछ नहीं बोली। फिर वो मुझे बेड पर ले आया और वो मेरे बूब्स को दबाते हुए मेरे निप्पल को चूसने लगा, तो में कुछ भी नहीं बोल पा रही थी। फिर उसने मुझसे पूछा कि मेरी पेंटी पर क्या लिखा है? मैंने कहा कि नहीं देखा नहीं, तो वो कहने लगा, चोदो मुझे और में तुम्हें जमकर चोदूंगा। अब मैंने कहा कि में भी तो यही चाहती हूँ। तब उसने मुझसे कहा कि में अगर तुम्हें गालियाँ दूँ या उल्टा सीधा कहूँ, तो तुम बुरा मत मानना, में चुप रही। धीरज ने कहा कि घर फोन कर दो। तब मैंने उससे कहा कि हाँ में कर दूँगी, में फिर बेड पर आकर लेट गई, मेरे पास पहले धीरज आया और वो कहने लगा कि आज़ बहुत मज़ा आएगा। फिर मैंने उससे कहा कि में भी तो यही चाहती हूँ, समीर मेरे बूब्स मुहं में लेकर चूसने लगा, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और अब धीरज पेंटी को साईड में करके मेरी चूत को चाट रहा था, जिसकी वजह से में एकदम पागल हो रही थी और इसलिए सबसे पहले मैंने उठकर धीरज के कपड़े उतार दिये। उसके बाद मैंने समीर के कपड़े भी उतार दिए और तभी में समीर का लंबा मोटा तनकर बिल्कुल सीधा खड़ा लंड देखकर बिल्कुल परेशान हो गई और मुझे मुंबई में हुई अपनी चुदाई की याद आ गई, क्योंकि मुझे इससे पहले अभी तक नहीं पता था कि किसी इंडियन का लंड इतना बड़ा, मोटा भी हो सकता है?

अब समीर ने मुझसे लंड को मुहं में लेने को कहा तो मैंने ऊपर से ही लंड को पकड़कर चाटना शुरू किया, जब उसका लंड एकदम खड़ा हो गया तो उसने मेरी चूत को चाटना शुरू किया। फिर मैंने कुछ देर बाद उससे मना किया कि में झड़ जाऊंगी, प्लीज अब छोड़ दो मुझे, लेकिन वो फिर भी चाट रहा था। उसके बाद वो नीचे लेट गया और मुझे अपने ऊपर बैठने के लिए कहा। अब मैंने उससे कहा कि मुझे इसमें इतना मज़ा नहीं आता तो उसने कहा कि आ जाओ। थोड़ी देर में हम पोज़ बदल देंगे और उसका लंड एकदम सरीए की तरह तनकर खड़ा हुआ था। मैंने उससे कहा कि यह बहुत बड़ा है। फिर उसने मुझसे कहा कि तुमने अभी मेरे बॉस का लंड नहीं देखा। फिर मैंने पूछा ऐसा क्या है? फिर वो कहने लगा कि हम उस बारे में बाद में बात करते है। अब में उसके लंड पर बैठने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी। फिर उसने अपना लंड मेरी चूत पर सटाकर मेरी कमर को पकड़कर नीचे किया। फिर मैंने उससे कहा कि पहले तुम मुझे मेरी पेंटी तो उतार लेने दो। तब उसने कहा कि इसकी कोई ज़रूरत नहीं है, ऐसे ही ठीक है और आह्ह्ह्हहह करते हुए उसका आधा लंड मेरी चूत के अंदर चला गया।

दोस्तों बिना कंडोम के यह मेरा पहला लंड था, जो मेरी चूत में इतनी बेरहमी से अंदर जा रहा था। अब आधा लंड लेकर में रुक गई, वो भी ज़ल्दी में नहीं था। थोड़ी देर बाद मैंने और नीचे होने की कोशिश की और हिम्मत करके पूरा बैठ गई और अब तो मुझमें बिल्कुल भी हिलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी। उसने लेटे लेटे ही मुझे हिलाना शुरू किया और उसका पूरा का पूरा लंड मेरी चूत की पूरी गहराई में जा चुका था और में दर्द की वजह से आहह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ आईईईइ माँ मर गई कर रही थी। तभी उसने मुझसे कहा कि जब तुम मेरा नहीं झेल पा रही हो, तो मेरे बॉस का क्या अंदर ले पाओगी? तो मैंने उससे कहा कि मुझे लेना ही कब है? वो कुछ नहीं बोला और ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर मुझे चोदने लगा और में भी ऊऊईईईईई ऊऊऊओ करके ऊपर नीचे होने लगी। उसके हर एक धक्के के साथ उसका लंड मेरी चूत की पूरी गहराई में जाकर रूक रहा था। में बहुत दिनों बाद अपनी चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी। फिर मैंने पलटकर देखा, लेकिन मुझे धीरज कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन में तो उसके साथ अपनी चुदाई में मस्त थी। फिर थोड़ी देर तक उसने मुझे ऐसे ही चोदते हुए मुझसे पूछा क्यों कैसा लग रहा? मैंने कहा कि बहुत अच्छा वो और ज़ोर से झटके मारने लगा। फिर क्या था? उसकी स्पीड ऐसी बढ़ी कि में ऊऊऊऊऊओह आआआआहह माँ मर गई, अब नहीं करती रही और वो लगातार मुझे झटके लगाता रहा। में अब तक दो बार झड़ चुकी थी, इस बीच उसने मेरी कमर को कसकर पकड़ लिया और रुक गया। तभी मैंने अपनी चूत के अंदर कुछ गिरने का एहसास किया। में जब तक उससे कहती कि बाहर निकालना तब तक वो अंदर झड़ चुका था और उसका लंड मुझे अंदर लेने में मज़ा तो बहुत आया, लेकिन डर भी था कि कहीं कोई समस्या खड़ी ना हो जाए।

फिर जब में समीर के ऊपर से उतरी, तब तक धीरज आ चुका था और अब वो मेरी चूत को चाटने लगा। मैंने उससे कहा कि प्लीज थोड़ी देर तो रुक जाओ, में थोड़ा सा आराम करना चाहती हूँ, तब भी वो मेरी चूत को चाट रहा था। फिर थोड़ी देर बाद उसने अपनी तीन उँगलियों को मेरी चूत में डाल दिया और अब वो अंदर बाहर करने लगा। अब उसने समीर से कहा कि बॉस अपना काम हो जाएगा तो मैंने उससे पूछा कि कौन सा काम? तो उसने मुझसे कहा कि कुछ नहीं और में आँख बंद करके लेटी रही। थोड़ी देर तक धीरज ऐसे ही करता रहा। फिर उसने दो तकिए मेरी गांड के नीचे लगा दिए, जिसकी वजह से अब मेरी चूत बहुत ऊपर उठकर पूरी खुल चुकी थी और वो मेरे बूब्स को निचोड़ने लगा, जिसकी वजह से मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मुझे फिर उसने अपना लंड मेरी चूत पर लगते ही एक ज़ोरदार धक्के के साथ अंदर कर दिया और रुक गया। थोड़ी देर तक ऐसे ही रुके रहने के बाद उसने अपना लंड एक बार फिर से बाहर निकाला और फिर ज़ोर से झटका देते हुए पूरा अंदर कर दिया, जिसकी वजह से मेरे मुहं से चीख भी नहीं निकल पा रही थी। मैंने उससे कहा कि वो स्पीड से धक्के लगाए। तब उसने मुझसे कहा कि ऐसा करने से में ज़ल्दी झड़ जाऊँगा और में ज़ल्दी नहीं झड़ना चाहता। मैंने देखा तो सामने से मुझे समीर नज़र नहीं आया तो मैंने पूछा धीरज ने मुझसे कहा कि वो अभी आता ही होगा।

अब में नीचे से उछल उछलकर उसका पूरा लंड अंदर ले रही थी और उसने अपने लंड पर कंडोम लगाया हुआ था, इसलिए में उसका लंड चिकना होने की वजह से बहुत आराम से अपनी चूत के अंदर ले पा रही थी और अब में आअहह उफ्फ्फ हाँ तेज और तेज करती जा रही थी। थोड़ी देर बाद में जब झड़ी तो में उसकी कमर पकड़कर चिपककर गई और चार पाँच धक्के देने के बाद वो भी झड़ गया और अब वो मेरे ऊपर ही लेट गया और अब समीर लौटकर वापस आ गया, मेरे एक तरफ समीर और एक तरफ धीरज लेट गया और फिर वो दोनों मेरे गरम सेक्सी बदन से खेलने लगे। उसके बाद वो मेरे मुहं के पास आकर बैठ गये और अपना लंड मेरे मुहं में डाल दिया और में एक एक करके उनके लंड को बारी बारी से चाट रही थी। थोड़ी देर बाद फिर समीर का लंड एकदम टाईट हो गया। फिर वो दोनों मुझे बेड से नीचे उतारकर जमीन पर ले आए और उन्होंने मुझसे कुतिया बनने को कहा तो में जब बेड पकड़कर कुतिया बनी, तब समीर ने मुझसे कहा कि तुम धीरज की कमर को पकड़कर उसका लंड चूसो और फिर मैंने उसके कहने पर ऐसा ही किया, जैसे ही समीर ने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ते हुए धक्का दिया तो में गिरने को हुई और मैंने ज़ोर से धीरज की कमर को पकड़ लिया। धीरज का लगभग पूरा लंड मेरे मुहं में चला गया, लेकिन मेरे मुहं में लंड होने की वजह से मेरे मुहं से चीख नहीं निकल पाई। फिर समीर जोश में आ गया। में चीखना चाहती थी, लेकिन नहीं चीख पाई और मैंने धीरज का लंड अपने मुहं से जैसे ही बाहर निकाला तो मेरे मुहं से चीख निकल गई, में आहहह्ह्ह्हह आईईईईई कर बैठी, धीरज ने अपना लंड एक बार फिर से मेरे मुहं में डाल दिया। थोड़ी देर के बाद धीरज मेरे मुहं में ही झड़ गया और मैंने उसका वीर्य अपने मुहं से बाहर थूक दिया। एक बार फिर से समीर ने अपना वीर्य मेरी चूत में ही डालकर वो भी झड़ गया। में अपनी चुदाई उन दोनों के लंड से करवाकर मन ही मन बहुत खुश थी और मेरी संतुष्टि मेरे चेहरे से साफ साफ झलक रही थी। मुझे जैसी अपनी चुदाई की उम्मीद उन दोनों से थी, उन्होंने मुझे उससे ज्यादा मज़ा दिया और मेरी ख़ुशी को वो दोनों भी अब तक भली भांति से भांप चुके थे और कुछ देर मेरे गरम बदन से कुछ देर खेलने के बाद में वहाँ से उठ गई और कमरे से बाहर निकलकर में सीधी बाथरूम में आ गई और अब में अपने आपको हर जगह से साफ करने लगी और जब में बाथरूम से बाहर निकली तो मैंने देखा कि समीर अपने लेपटॉप पर कुछ काम कर रहा था। मैंने उससे पूछा कि तुम इतनी रात में क्या कर रहे हो?

फिर वो हंसकर मुझसे कहने लगा कि बस पांच मिनट रूको मेरी जान, में तुम्हें सब कुछ दिखाता हूँ कि में अभी क्या काम कर रहा हूँ और कुछ देर पहले तुम हम दोनों के साथ क्या क्या कर रही थी और करीब पांच मिनट के बाद उसने पाँच पाँच मिनट की दो वीडियो क्लिप मुझे दिखाई, जिसमें वो और धीरज बारी बारी से मुझे चोद रहे थे और में उनके साथ बड़े मज़े लेकर अपनी चुदाई करवा रही थी। उसको देखकर में बहुत ज्यादा डर गई और मेरे चेहरे का रंग एकदम उड़ गया। में पूरी पसीने से भीग चुकी थी और मैंने जब उससे पूछा कि तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? तो उसने कहा कि में तुम्हें दो दिन के लिए दिल्ली ले जाना चाहता हूँ और तुम्हारे साथ ऐसी चुदाई का मज़ा में वहां पर भी लेना चाहता हूँ। तब मैंने उससे कहा कि अगर ऐसा है तो तुम मुझसे ऐसे ही कह देते, में तो शायद ऐसे ही तैयार हो जाती, में जब इस समय तुम्हारे साथ होटल में रात भर रुक सकती हूँ तो दिल्ली में भी तुम्हारे साथ जरुर जा सकती हूँ और जब मैंने उससे दिल्ली जाने का वादा किया, तब उसने अपना मोबाइल मुझे दे दिया और फिर वो कहने लगा कि तुम अगर चाहो तो इसको डिलीट कर दो। दोस्तों मैंने उसके हाथ से वो मोबाइल लेकर वो दोनों विडियो डिलीट कर दी। फिर सुबह में उससे दो बज़े मिलने का वादा करके अपने घर के लिए निकल पड़ी, लेकिन में आज बहुत खुश थी अपनी चुदाई को सोच सोचकर और मन ही मन मुस्कुरा रही थी और फिर में कुछ देर बाद अपने घर पर पहुंच गई, मुझे पता ही नहीं चला ।।

धन्यवाद …

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