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नीलम भाभी ने चोदना सिखाया 

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के प्यारे दोस्तों मेरा नाम अक्षय है। और इस समय मैं सर्विस करता हूँ। ये उस समय की बात है जब मैं बारहवीं क्लास में पढ़ता था। हमारे पड़ोस में एक भैया रहते थे, जिन्हें मेरे पापा ने नौकरी पर लगाया था, ट्रांसपोर्ट लाइन में एक साल के बाद वो अपनी पत्नी नीलम को साथ में रहने के लिए ले कर आ गए थे। मैं शुरू से ही फुटबॉल प्लेयर था, मैं अपनी स्कूल की सीनियर फुटबॉल टीम का कप्तान था और मैं 10 वीं क्लास से कसरत भी किया करता था नतीजतन मेरा शरीर बहुत मस्त था। मेरी हाइट 5 फीट 10 इंच उसी समय हो गई थी। मेरा सीना तब 36 इंच था, अभी 42 है। हाँ.. तो अब मैं नीलम के बारे में बताता हूँ, वो एक 5 फीट 2 इंच की 24 साल की सामान्य महिला थी, जिसकी शादी को तब 2 साल हुए थे। उसका रंग सांवला था, जिसके कारण उसका पति उसे पसंद नहीं करता था। मुझे कई बार ऐसा लगता था, जैसे वो मुझे लिफ्ट दे रही है लेकिन तब मुझ पर कसरत का जूनून था, तो मैं किसी लड़की या औरत की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देता था। हालाँकि मैं अपने फ्रेंड्स के साथ कभी कभी नंगी मूवीज देख लेता था। एक बार जब हम अपनी गली में क्रिकेट खेल रहे थे, तब मुझसे गेंद भाभी की छत पर चली गई तो मैं लेने गया। छत पर जाकर मैंने देखा भाभी ब्रा-पैंटी में आँगन में नहा रही थीं। मैं तो उन्हें देखता ही रह गया। वो सांवली सी शक्ल वाली नीलम भाभी का बदन बहुत गोरा था। उनके बोबे क्या मस्त थे शानदार से और टाँगें क्या मांसल थी। वो मुझे छत पर देख कर एक पल को घबराईं, फिर मुझसे पूछा- क्या देख रहा है? मैं तो जैसे कुछ सुन ही नहीं रहा था, उनके अर्धनग्न जिस्म को देख कर मेरा लंड लोअर में ही तन गया था। भाभी ने दुबारा पुछा, तो मुझे होश आया और पूछा- हमारी गेंद आई है क्या? भाभी ने फ़ौरन कहा- तुझे दो गेंदें तो नहीं दिख रही हैं… नहीं आई है तुम्हारी गेंद यहाँ पर…! इतने मैं पास वाले घर के अंकल नीचे अपने घर से बोले- अरे तुम ये रोज़-रोज़ यहाँ गेंद क्यूँ फैंकते हो? मैंने अंकल से ‘सॉरी’ फील करके गेंद ली और वापिस आ गया लेकिन अब मेरा खेलने में मन नहीं लग रहा था, मेरा 7 इंच लम्बा और 5 इंच गोलाई का लंड शांत ही नहीं हो रहा था। मैं तुरंत अपने घर गया और बाथरूम में जा कर अपना लंड हिला लिया पर थोड़ी ही देर में मेरा लंड फिर तन गया, मैंने फिर हिला लिया। अगले दिन मैं ढंग से फुटबॉल नहीं खेल पाया। अब तो मैं हर घड़ी भाभी को ही देखता रहता था, शायद नीलम भाभी को भी इस बात का अहसास हो गया था। फिर एक दिन उन्होंने मुझे अपने घर में प्रेस ठीक करने के लिए बुलाया। मैं घबरा गया कि उनसे कैसे नज़रें मिलाऊँगा, पर हिम्मत करके चला गया। वहाँ देखा भाभी ने नीले रंग की साड़ी पहने हुई थी, वो बहुत खूबसूरत लग रही थीं। ये कामदेव भी गजब करते हैं, जब सेक्स दिमाग पर हावी होता है तो हर लड़की, औरत अप्सरा की तरह लगती है। नीलम का ब्लाउज कुछ ज्यादा ही टाइट था, उसके बोबे ऊपर की तरफ हल्के से निकले हुए दिख रहे थे। उसने साड़ी बहुत कस कर बाँधी थी, जिस कारण उसके कूल्हे भी उभरे हुए दिख रहे थे, कुल मिला कर पूरी चोदने लायक लग रही थी। उसने मुझे प्रेस चेक करने को दी और चाय के लिए पूछा। मैंने कहा- नहीं.. मैं नहीं पीता..! तो नीलम भाभी बोली- गरम चाय नहीं पिएगा, तो चार्ज कैसे होगा..! मैंने कहा- मैं कुछ समझा नहीं? तो वो हँस कर बोलीं- समझ जाएगा..! जब तक वो चाय बना कर लाईं, उतनी देर में मैंने प्रेस ठीक कर दी, एक तार प्लग से निकली हुई थी। मैंने पूछा- भाभी, भैया ने इसे ठीक नहीं किया..! तो भाभी बोलीं- उन्हें कुछ नहीं आता.. मैं यहाँ हूँ और वो काम से 15 दिन के लिए गुजरात चले गए। मैंने कहा- ऐसे कैसे हो सकता है, मेरी आप जैसी बीवी हो, तो मैं तो छोड़ कर ही न जाऊँ… हमेशा अपनी बीवी के पास ही रहूँ। भाभी बोलीं- मैं काली हूँ न, इसलिए..! तो झट से मेरे मुँह से निकल गया- अरे आप तो बहुत गोरी हो.. भैया ने कभी आपको नंगी नहीं देखा क्या? भाभी ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें खोल कर मुझे देखा और कहा- तूने मुझे नंगी बड़े गौर से देखा है..! मैंने तुरंत सकपका कर कहा- नहीं भाभी उस दिन आपको नहाते हुए देखा था न..! भाभी मेरी बगल में आकर बोलीं- और क्या-क्या देखा था तूने..! मैं डर गया और कहा- नहीं भाभी.. कुछ नहीं देखा, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगा..! नीलम भाभी जोर से हँसी और मेरा हाथ पकड़ कर बोलीं- डर मत… बता न.. क्या-क्या देखा तूने..! मुझ में थोड़ी हिम्मत आई, तो मैंने कहा- भाभी आपका नंगा जिस्म बहुत गोरा है। भाभी ने पूछा- और? मैंने कहा- आपकी छातियाँ बहुत सुन्दर हैं। भाभी ने मेरी जांघ पर हाथ रख कर पूछा- और..! तो मैंने हिम्मत कर के कहा- आपकी जांघें भी बहुत सुडौल और शानदार हैं। इतने में मेरा लंड भी कड़क हो गया। भाभी ने एक लम्बी सांस भरी और कहा- तुम्हारे भैया को यह सब नहीं दिखता, उन्हें सिर्फ मेरे चेहरे का रंग दिखता है। मैंने भाभी की जांघ पर हाथ रखा और कहा- सब ठीक हो जाएगा भाभी..! भाभी ने मेरी तरफ घूर कर देखा। मैंने उनकी जाँघ से हाथ हटा लिया, तो वो हँस पड़ीं और कहा- तुम बहुत क्यूट हो..! फिर भाभी दुबारा रसोई में चलीं गईं और मैं मैगजीनें देखने लग गया। वहाँ एक सेक्स दृश्यों वाली किताब पड़ी थी, मैं उसे देखने लग गया। इतने मुझे पता ही न चला कि भाभी कब मेरे पीछे खड़ी हो गई हैं। तभी भाभी बोलीं- क्या देख रहे हो..? मैं बोला- कुछ नहीं..! और मेरे हाथों से किताब गिर गई। भाभी ने किताब उठाई और कहा- क्या कभी ये सब किया है? मैंने न में सर हिलाया, तो भाभी मेरे लंड पर हाथ रख कर बोलीं- करोगे? मैं आज तक नहीं समझ पाया कि मेरा सर अपने आप हाँ में कैसे हिल गया। और उधर भाभी की आँखों की चमक देखने लायक थी, नीलम ने फटाफट जा कर दरवाजा अन्दर से लॉक किया और मुझे बेडरूम में ले गईं। बेडरूम में पहुँचते ही उसने मेरे होंठों को अपने होंठों की कैद में ले लिया। यह मेरी जिन्दगी का पहला चुम्बन था। मेरे हाथ अपने आप उसके चूतड़ों पर चले गए और मैं उसकी मादक गांड मसलने लगा। नीलम के मुँह से चुम्बन करने के बावजूद भी मादक आवाजें निकल रही थी। उसने अपना एक हाथ मेरी कमर में लपेटा और दूसरे से मेरे लंड को लोअर को ऊपर से पकड़ा। मैं बता नहीं सकता उस वक़्त मुझे क्या शानदार गीला-गीला सा अनुभव हुआ। उसके मस्त मोटे-मोटे सख्त बोबे मेरी छाती में चुभ रहे थे। मेरी दोनों हथेलियों में उसकी मदमस्त गांड थी। वो ‘आह…ऊह्ह…’ की मीठी सी हल्की-हल्की आवाजें निकाल रही थी। एक शानदार चुम्बन के बाद वो अपने घुटनों पर बैठी और मेरे लोअर के ऊपर से मेरे लंड पर अपने होंठ फिराने लगी। मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मेरा लंड कपड़े फाड़ कर बाहर आने को हो गया। मेरी मुठ्ठियाँ उसके बालों में बंध गईं और मेरा सर पीछे की तरफ हो गया… आँखें बंद हो गईं… उनमें पहली चुदाई के सपने नजर आने लगे, पहली बार चूत मारने के ख्वाब और न जाने क्या-क्या। तभी मेरा लोअर नीचे सरका, साथ में चड्डी भी सरक गई और देखते ही देखते मेरा 7.5 इंच का लंड नीलम के मुँह में था। हाय… वो चिपचिपा स्पर्श…! मैं तो जैसे आसमान में तैरने लगा… मेरी मुठ्ठियाँ और भींच गईं…. मेरा लंड फटने की सीमा तक कड़क हो गया। तभी थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने भाभी को कहा तो भाभी ने आँखों से इशारे में कहा- कोई बात नहीं…! थोड़ी देर में मेरा पूरा माल नीलम के मुँह में निकल गया और वो उसे पूरा स्वाद ले कर निगल गई। मैं पानी निकलने के बाद भी इतना उत्तेजित था कि मेरा लवड़ा बिल्कुल भी नहीं बैठा, पर मुझे अब मेरे लंड के टोपे पर गुदगुदी हो रही थी। नीलम एक लम्बी सांस ली और बोली- कैसा लगा? मेरे चेहरे पर संतुष्टि देख कर वो सब समझ गई। नीलम ने फटाफट अपनी साड़ी उतारी और पेटीकोट को जाँघों तक उठा कर आँखें बंद करके पलंग पर लेट गई। मैंने अपना लोअर और चड्डी उतारे और उसके बगल मैं लेट कर उसके बोबे दबाने लग गया। उसके बोबे बहुत सख्त हो गए थे। तभी वो बोली- शर्ट मैं उतारूँ या? उसका इतना बोलना था और मैंने फटाफट शर्ट उतार दी। वो मुस्कुरा कर मेरी छाती से लिपट गई। मैंने नीलम की गांड पर हाथ फेरते हुए कहा- तुम्हारे कपड़े फाड़ दूँ या तुम उतार रही हो…! वो हँस कर बोली- वाह… मेरे शेर के मुँह में भी जुबान है, चलो तुम खुद ही उतार दो। मैंने फटाफट उसका ब्लाउज उतार कर नीचे फैंक दिया। फिर बड़े जतन से ब्रा उतारी, वो मेरे अनाड़ीपन को देख कर खूब हँस रही थी, पर मुझे पता था उसकी चूत भी मेरा लंड निगलने के लिए बेक़रार है। ब्रा उतारते ही मेरा रोम-रोम खिल गया, क्या गजब के बोबे थे नीलम के, एकदम तराशे हुए..! मैं तो एकटक उन्हें देखता ही रह गया …! इतने में वो मेरा एक हाथ अपने एक बोबे रखते हुए दूसरे को चूसने को बोली। मैं भूखे कुत्ते की तरह नीलम के बोबों पर टूट पड़ा और वो सिसकारियाँ लेने लगी- आह.. ऊउह्ह्ह .. वाऊ.. तुम बहुत जानदार हो अक्षय … आई लव यू उफ्फ्फफफ्फ्फ्फ़ … और चूसो… और चाटो… मेरे बोबों को… ये बहुत प्यासे हैं..! मैंने उसकी जाँघों पर हाथ रखा, नीलम ने अपनी जांघें बुरी तरह से भींच रखी थीं, तभी मैंने ऊपर से उसकी चूत पर हाथ रखा और उसे मसलने लगा। उसने अपनी जाँघें खोल दीं और मैं नीचे तक उसकी चूत मसलने लगा। मैंने उसे चुम्बन किया। थोड़ी देर मैं वो बोली- और भी दो कपड़े अभी बाकी हैं उतारने को..! मैं फटाफट उसका पेटीकोट खोलने लगा और तभी गाँठ फंस गई। नीलम जोर से हँसी और बोली- अब खोल के दिखा? मैंने 5 मिनट तक कोशिश की, फिर झुंझला कर नाड़ा तोड़ दिया। नीलम जोर से हँसी और बोली- बड़ा जोर है तुझमें… थोड़ी देर रुक सारी हेकड़ी निकाल दूँगी…! मैंने उसकी बातों को अनसुना कर एक झटके से उसकी पैंटी उतार दी। पैंटी उतारते ही हम दोनों के मुँह से एक साथ स्ससीई… की आवाज निकल गई। अब मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करूँ…! मेरी मनोस्थिति देख भाभी हँस कर बोली- कभी चूत चाटी है..! मैंने कहा- मैंने देखी ही पहली बार है..! उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि उसका पानी जाँघों पर भी आ गया था। तभी नीलम बोली- चाट मेरे राजा…! और मैं जैसे चाबी भरे खिलौने की तरह उसकी टांगों के बीच में ठीक चूत के ऊपर पहुँच गया। एक बार को तो मुझे बहुत घिन आई, पर भाभी की चूत की मादक खुशबू ने मुझे पागल कर दिया और मैं नीलम की सुन्दर सी चूत को पूरे जोश से चाटने लगा। नीलम की सिसकारियों की आवाज लगातार बढ़ती गई- आ..हह… जियो मेरी जान…तुम लाजवाब हो अक्षय…मैं पागल हो रही हूँ… अब नहीं रुका जाता… ओह्ह्हह्ह्ह्ह… बस करो…बस करो… बस करो…! आ..हह…. अब अपना लंड घुसा दो मेरी चूत में …प्लीज़….जज्ज.जज…! एक झटके से नीलम ने मेरा मुँह ऊपर उठाया और मेरे होंठों को जोर-जोर से चूसने लगी। मेरा पूरा बदन कांप रहा था, मैंने उखड़ती साँसों से भाभी की तरफ देखा। नीलम ने अपनी टांगें फैलाईं और मुझे लंड डालने को कहा। मैंने 2-4 बार लंड डालने की कोशिश की पर वो इधर-उधर फिसल गया। नीलम ने मुस्कराते हुए मेरा लंड चूत के मुँह पर रखा और मुझे धक्का लगाने को कहा। मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा आधा लंड नीलम की चूत में धंस गया। नीलम के मुँह से एक चीख निकली और मेरे मुँह से एक ‘आ..हह…’ निकल गई, नीलम बोली- आराम से.. छह महीने बाद डलवा रही हूँ…! पर मैं कहा रुकने वाला था, एक रूहानी अहसास जो मिल रहा था…! जो कभी नहीं सोचा था वो हो रहा था, मैं कुत्ते की तरह अपना लंड उसकी चूत में पेलने लगा गया। नीलम थोड़ी देर दर्द से कराहती रही फिर नार्मल हो कर बोली- आराम से… मेरी जान आराम से … चूत-लंड के इस खेल का पूरा मज़ा लो…! आराम से चोदो.. नहीं तो जल्दी झड़ जायेगा…! पर मुझे तो कुछ भी नहीं सुनाई दे रहा था। मैं तो अपनी पूरी ताकत से लंड पेल रहा था- उम्म्म…अआह्ह्ह …मज़ा आ गया… भाभी क्या चीज़ हो तुम… क्या मस्त टाइट चूत है तुम्हारी.. वाह ह्ह्ह्हह..! नीलम- आराम से मेरी जान, पूरा दिन है… आ..हह..ई… प्लीज रुको मैं निकल रही हूँ…! मैं- ये निकलना क्या होता है भाभी? प्लीज मुझे मत रोको…आ..हह..वाह्हह्हह्ह.. मज़ा आ गया भाभी… मैं जिंदगी भर आपकी गुलामी करूँगा.. बस मुझसे ऐसे ही चुदवाते रहना…प्लीज..जज्ज…! और मेरा पानी झड़ झड़ करता हुआ पूरा का पूरा नीलम की चूत में निकल गया। मैं थके हुए पहलवान की तरह भाभी पर गिर गया। पसीने में हम दोनों भीग गए। मैंने भाभी के होंठों को चूसने लगा। तभी भाभी का पूरा शरीर अकड़ गया और उन्होंने मुझे जोर से भींच लिया। मैंने पूछा- क्या हुआ भाभी..! वो बोलीं- बेवकूफ बताया था न… मैं निकलने वाली हूँ ..! इतना बोल कर नीलम एकदम पस्त हो गई, आँखें बंद और चेहरे पर मंद-मंद मुस्कान…! मुझे कुछ समझ नहीं आया, पर देख कर बहुत अच्छा लगा। मैं नीलम को चूमने लगा, तब नीलम बोली- मेरी जान, जैसे आदमी का वीर्य निकलता है न… वैसे ही हमारा भी निकलता है.. अब समझा बुद्धू…कहा था न… आराम से चोद, निकल गया न दो मिनट में ही..! मैं- तुम्हें मज़ा नहीं आया क्या..! नीलम- भोंदू… मज़ा तो बहुत आया, पर तू आराम से करता तो और थोड़ी देर तक मज़ा ले लेते। मैं- तो अभी क्या बिगड़ा है एक बार और हो जाए। नीलम हँस कर- आज ही पूरा चूस लेगा अपनी भाभी को… कल क्या करेगा..! मैं- मेरी जान कल फिर चूस लूँगा..! 15 मिनट हम ऐसे ही मस्ती मारते रहे। नीलम ने मुझे चुदाई के काफी टिप्स दिए। फिर उसने वापिस मेरा लंड चूस-चूस कर खड़ा कर दिया। अबकी बार मैंने उसकी चूत के पूरे 20 मिनट तक मज़े लेते हुए कभी घोड़ी बना कर चोदा तो कभी आड़ा लिटा कर और भी बहुत से आसनों में चोदा। उस दिन मैंने उसको और दो बार चोदा। हम दोनों बहुत थक गए थे। नीलम वहाँ छह महीने तक रही और मैंने पूरे छ: महीने उसकी गुलामी की, अपने लंड से उसकी भरपूर सेवा की। छह महीने बाद जब वो गई, तब वो पेट से थी। मुझे नहीं पता, वो मेरा था या उसके पति का। अगर आपको मेरी आपबीती पसंद आई हो तो जरूर बताना ! 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